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26/11 आतंकी हमला: कहानी उस हीरो की जिसने बचाई 157 लोगों की जान

26/11 2008 ये दिन भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई पर कहर बनकर टूटा। आग में लिपटा होटल ताज और CST स्टेशन पर लगे लाशों के अंबार से पूरे देश में देहशत फैल चुका था। भागते हुए लोगों की चीख और गोलियों की आवाज को पूरा हिन्दुस्तान टीवी पर देख रहा था। ये हमला मुंबई पर नहीं बल्कि भारत की संप्रभुता पर था। 26/11 की उस रात मुंबई में कई घटनाएं एक साथ हो रही थी। एक तरफ जहां आंतकी मासूमों का खून बहा रहे थे तो वहीं कुछ लोग अपनी बहादुरी से लोगों की जान बचा रहे थे। सेना और सुरक्षाकर्मियों ने 3 दिन चले ऑपरेशन में आतंकियों का सफाया कर दिया था। लेकिन इस बीच कोई ऐसा भी था जो भारतीय सेना का हिस्सा नहीं था लेकिन उसकी बहादुरी ने 157 लोगों की जान बचाई थी।

ये कहानी है रवि धर्निधिरका की। रवि अमेरिकी नेवी का हिस्सा थे। वह एक ऑपरेशन के लिए 4 साल ईराक में भी रह चुके थे। इतना ही नहीं रवि ने 2004 में फलुजा की लड़ाई में भी हिस्सा लिया था। रवि धर्निधिरका उन दिनों भारत आए हुए थे। 26/11 को रवि अपने अंकल से मिलने होटल ताज के लेबनानी रेस्टां ‘सुक’ में पहंचे। रवि जब होटल ताज के अंदर पहुंचे तो वो हैरान रह गए।

रवि धर्निधिरका

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रवि ये सोच रहे थे कि इतने बड़े होटल में सुरक्षा के लिए कोई कड़ा इंतजाम क्यों नहीं है। रवि ने होटल के एंट्रेंस पर एक बात नोट की थी। उन्होंने देखा कि जब वह मेटेल डिटेक्टर से होकर निकले तो वह काम नहीं कर रहा था। इस बात से वहां बैठे सुरक्षाकर्मी को कोई फर्क भी नहीं पड़ रहा था। रवि कुछ देर वहां खड़े रहे तब उन्हें पता चला कि मेटेल डिटेक्टर काम ही नहीं कर रहा है। खैर रवि होटल की 20वीं मंजिल पर चले गए जहां पर उनका इंतजार उनके अंकल कर रहे थे।

रवि धर्निधिरका अपने अंकल के साथ बैठे ही थे कि अचानक से रेस्टां में बैठे बहुत सारे लोगों के फोन एक साथ बजने लगे। रवि के अंकल के पास भी एक फोन आया। कुछ ही देर में सबको पता चल चुका था कि मुंबई में आतंकी हमला हो गया है। लोगों के पास ख़बर तेजी से आने लगी। रवि और उनके बगल बैठे लोग अभी पता ही लगा रहे थे कि तभी होटल के अंदर चीख पुकार मचने लगी।

उन्हें ये समझने में देर नहीं लगी कि होटल के अंदर आतंकी घुस आएं है। रवि तुरंत खड़े हुए और वहां मौजूद लोगों को बताने लगे कि अब उन्हें खुद बचकर निकलना होगा। रवि की नज़र रेस्टां के एक दरवाजे पर पड़ी। दरवाजा कांच का बना हुआ था। दरअसल उन लोगों ने रेस्टां का दरवाजा तो बंद कर दिया था लेकिन दरवाजे के उस तरफ से आतंकवादी उन लोगों पर ग्रेनेड फेंक सकते थे। रवि ने वहां मौजूद सभी लोगों को दूसरे हॉल में चलने के लिए कहा। रवि तेजी से लोगों को लेकर हॉल के अंदर घुस गए। हॉल का दरवाजा अंदर से लगा दिया गया। दरवाजे के पास सोफे भी लगा दिए गए थे ताकि आसानी से कोई अंदर न आ सके।

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रवि समय-समय पर खिड़की से बाहर देख रहे थे ताकि पता चल सके कि बाहर हो क्या हो रहा है। कुछ ही देर में होटल की छठी मंजिल पर दो धमाके हुए। वहां बुरी तरह से आग लग चुकी थी। रवि ने सोचा कि अगर ये लोग यहीं फंसे रह गए तो हो सकता है कि शॉट सर्किट हो जाए और 20वीं मंजिल पर भी आग लग जाए। रवि कोई गलत फैसला नहीं लेना चाहते थे, इसलिए उन्होंने हॉल में मौजूद लोगों से कहा…’सेना हमें बचाने आ रही है, लेकिन वो कब तक यहां पहुंचेगी ये नहीं पता’ लोग रवि को ध्यान से सुन रहे थे। रवि ने आगे कहा- ‘नीचे आग लग चुकी है..हमें पीछे की सीढ़ियों से भागना होगा’। रवि नेवी के कई खौफनाक ऑपरेशन का हिस्सा रह चुके थे। लेकिन एक साथ बिना हथियार के इतने लोगों को बचाना ये रवि ने कभी नहीं किया था।

रवि ने तेजी से एक रणनीति बनाई। उन्होने कुछ पूर्व सेना के कुछ अधिकारियों से आगे चलने को कहा..ताकि वह इस बात का ध्यान रखें कि बच्चों और महिलाओं को कई खतरा न हो। ऐसा ही हुआ। सबसे आगे पूर्व अधिकारी फिर पुरुष और महिलाएं और बच्चे। हॉल पूरी तरह से खाली हो चुका था। पीछे की सीढ़ियों से होकर 157 लोग नीचे भाग रहे थे। उन सभी लोगों को खासतौर से रवि ने कहा था कि जूतें उतार कर भागें और अपने मोबाइल फोन भी ऑफ कर लें। ऐसा ही हो रहा था। हॉल में आखिर में रवि अकेले बचे थे। अब वह भी नीचे की तरफ भागने जा रहा थे। इतने में ही उन्होंने देखा कि हॉल के कोने में एक बूढ़ी महिला बैठी हुई थी। वो महिला वील चेयर पर बैठी हुई थी। रवि ने कहा कि आपको नीचे चलना होगा। लेकिन महिला चलने में अक्षम थीं। उन्होंने रवि से कहा कि तुम मुझे छोड़कर चले जाओ जो होगा देखा जाएगा..लेकिन रवि उन्हें अकेला नहीं छोड़ सकते थे। रवि ने महिला को अपनी गोद में उठा लिया और तेजी से नीचे उतरने लगे। लेकिन 20 मंजिल किसी महिला को अपनी गोद में लेकर उतरना आसान नहीं था। लेकिन रवि ने हार नहीं मानी। वहीं नीचे आ चुके लोगों की निगाहें रवि पर टिकीं हुई थी। लोगों ने देखा की रवि एक बूढ़ी महिला को गोद में लेकर आ रहे हैं। रवि कि बहादुरी, हिम्मत और समझदारी से 157 लोगों की जान बच गई थी। रवि धर्निधिरका इन लोगों के लिए हिरो बन चुके थे।

26/11 आतंकी हमले को 9 साल हो चुके हैं। मुंबई ने उस दिन कई हिरों को देखा जिनकी वजह से हजारों जाने बची। 26/11 के ही एक ऐसे हिरो हैं रवि धर्निधिरका.. जिन्हें चंद लोगों के सिवाय कोई नहीं जानता…….

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