नरेन्द्र मोदी

नरेन्द्र मोदी को गुजरात में हराने के लिए सब जायज है!

2014 लोकसभा चुनाव में जिस गुजरात मॉडल को दिखाकर नरेन्द्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने उसी गुजरात में एक बार फिर से चुनाव है। मोदी अब गुजरात के मुख्यमंत्री तो नहीं है लेकिन उनकी दिवानगी यहां पहले जैसी ही बरकरार है। उनकी हर रैली में उमड़ने वाली लाखों की भीड़ विपक्षियों के हौसले पस्त कर देती है। लेकिन इस बार मोदी की चुनौती अलग है और जंग पहले से मुश्किल। नरेन्द्र मोदी की शख्सियत की तुलना में न तो पार्टी में कोई नेता है और न ही अमित शाह जैसा रणनीतिकार। ये बात अलग है कि इन दोनों की जोड़ी इस चुनाव में वैसे ही काम कर रही है जैसा पिछले विधानसभा में करती थी।

इस चुनाव क्या है बड़ी चुनौती?

  1. नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद पहला विधानसभा चुनाव

  2. नोटबंदी और जीएसटी लागू होने के बाद पहला चुनाव

  3. व्यापारियों का एक बड़ा वर्ग केंद्र की नीति से नाराज है

  4. सरकार इस वर्ग को मनाने में लगी हुई है और जीएसटी में बदलाव इसका नतीजा है

  5. आनंदीबेन से नाराज जनता को क्या सरकार मना पाई है?

  6. विजय रूपाणी सरकार की असल परीक्षा

  7. पाटीदार आंदोलन और दलित हमलों के बाद हो रहा चुनाव

कांग्रेस की बदली रणनीति से बीजेपी को कितना खतरा?

राज्यसभा चुनाव में लाचार और कमजोर दिख रही कांग्रेस बदली नजर आ रही है। कांग्रेस भाजपा विरोधियों को साथ ले कर चल रही है। NCP-JDU के विधायकों से जहां कांग्रेस गठबंधन में लगी है तो वहीं तीन बड़े युवा नेताओं को एक साथ मंच पर लाने की कोशिश जारी है। राज्यसभा चुनाव के दौरान अपने विधायकों को बचाने में लगी कांग्रेस अब भाजपा विरोधियों को एक कर रही है।

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क्या है कांग्रेस की रणनीति?

विकास की जाति से जंग- कांग्रेस भाजपा के विकास मॉडल की काट राज्य में नए राजनीतिक समीकरण से कर रही है। कांग्रेस पाटीदारों, दलितों, अल्पसंख्यों और ओबीसी समुदाय के बड़े नेताओं को भाजपा के खिलाफ करने में लगी है।

मोदी से लड़ेंगे कांग्रेस के युवा- नरेन्द्र मोदी के जादुई व्यक्तित्व से लड़ने के लिए कांग्रेस राज्य के तीन बड़े युवा चेहरे को एक साथ करने की कोशिश में लगी है। ये तीन युवा नेता है अल्पेश ठाकोर, हार्दिक पटेल और जिग्नेश मेवाणी।

OBC वोटबैंक में सेंध- OBC नेता अल्पेश ठाकोर के कांग्रेस में शामिल होने से जातीय समीकरण बदल गया है। गुजरात में 54 फीसदी OBC वोटर हैं। OBC वोटरों के एक बड़े तबके परअल्पेश ठाकोर की पकड़ है। ऐसे में क्या अल्पेश ठाकुर कांग्रेस को OBC वोट दिला पाएंगे ये बड़ा सवाल है?

पाटीदारों का गुस्सा- कांग्रेस ने पाटीदार आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल को पार्टी में शामिल करने का निमंत्रण पहले ही भेज रखा है। हार्दिक भाजपा को अहंकारी पार्टी बता रहे हैं और कहते हैं कि कांग्रेस में लोकतंत्र को बढावा मिलता है। हार्दिक का कहना है कि कांग्रेस को जीताने से ज्यादा वो भाजपा को हराना चाहते हैं। गुजरात में पार्टीदारों का 12 फीसदी वोट शेयर है। अब इस वोटबैंक पर हार्दिक कि कितनी पकड़ है और वो भाजपा को कितना नुकसान पहुंचा सकते हैं ये इस चुनाव में पता चलेगा।

दलित आंदोलन-  6 करोड़ 38 लाख आबादी वाले गुजरात में दलित 35 लाख 92 हजार हैं। ऐसे में दलित युवा नेता जिग्नेश मेवाणी को रिझाने में लगी कांग्रेस इस वोटबैंक का फायदा उठाना चाहती है।

बदले-बदले से लग रहे हैं राहुल– कांग्रेस पार्टी में कमजोर कड़ी माने जाने वाले राहुल गांधी इस बार बदले से नजर आ रहे हैं। राहुल भाजपा विरोधी खेमे को मजबूत करने में लगे हैं। वो बड़ी बात करने के बजाए संभल कर बोल रहे हैं। राहुल इस बार खुद कई रणनीति में सीधे शामिल हैं। ऐसे में गुजरात की जीत राहुल गांधी के सफलता और असफलता पर बड़ा असर करेगी।

शहजादे और शाह-जादे की जंग- 2014 में नरेन्द्र मोदी ने जिस तरह खुद को चायवाला और राहुल को शहजादा के रूप में दिखाया था वैसे ही कांग्रेस जय शाह को शाह-जादे बता रही है। कांग्रेस जय शाह के बहाने मोदी सरकार की इमानदार छवि को धूमिल करने की कोशिश कर रही है।

अर्थशास्त्र और व्यापारी- गुजरात का व्यापारी वर्ग हमेशा से नरेन्द्र मोदी के समर्थन में रहा है। बतौर मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के कई फैसलों का व्यापारी वर्ग समर्थन करता रहा लेकिन नोटबंदी और जीएसटी के बाद व्यापार और व्यापारियों को होने वाले नुकसान का फायदा कांग्रेस उठाने में लगी है। कांग्रेस मोदी सरकार को व्यापारी विरोधी घोषित करने में लगी है। यहीं कारण है कि अर्थव्यव्स्था से लेकर व्यापारियों के तमाम मुद्दों को राहुल गांधी से लेकर कांग्रेस के बड़े नेता जोर शोर से उठा रहे हैं।

सोशल मीडिया पर मिल रही है टक्कर- कांग्रेस की IT सेल सोशल मीडिया पर लड़ती नजर आ रही है। भाजपा की तुलना में कांग्रेस की IT सेल कमजोर है लेकिन आक्रमक है। जीएसटी से लेकर जय शाह तक के मुद्दे को सोशल मीडिया पर कांग्रेस पूरे जोर शोर से उठा रही है।

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क्या कांग्रेस ने घाटे का सौदा किया है

जानकारी के मुताबिक अल्पेश ठाकोर की बात भाजपा से चल रही थी। भाजपा ने अल्पेश को मंत्रीपद की भी पेशकश की थी लेकिन अल्पेश उप मुख्यमंत्री की मांग पर ठिके रहे। इस दौरान अल्पेश कांग्रेस के संपर्क में लगातार बने रहे। अल्पेश कांग्रेस पर दबाव बनाने में कामयाब रहे। कांग्रेस ने अल्पेश को उप मुख्यमंत्री पद देने का वादा कर दिया। जानकारी के मुताबिक बनासकांठा से अल्पेश के चुनाव लड़ने की बात को भी कांग्रेस ने मान लिया है। ऐसे में सवाल ये है कि क्या कांग्रेस ने घाटे का सौदा कर लिया? उप मुख्यमंत्री पद पार्टी के किसी नेता को देने के बजाए एक बाहरी नेता को देना कितना सही है? इससे कांग्रेस के अंदर फूट पड़ने का खतरा भी बढ गया है।कांग्रेस को ये गलती उत्तराखंड में भारी पड़ी थी। अल्पेश को बड़ी जिम्मेदारी ये बताता है कि कांग्रेस के अंदर कोई भी बड़ा नेता या नेतृत्व नहीं है।

जनता तो है बहाना भाजपा को है हराना

अल्पेश ठाकोर की राजनीति पाटीदार आरक्षण के खिलाफ रही है। ऐसे में अब जब अल्पेश कांग्रेस के साथ हैं तो हार्दिक क्यों साथ दे रहे हैं? अगर चुनाव में कांग्रेस जीतती है और अल्पेश उप मुख्यमंत्री बनते हैं तो हार्दिक पटेल पाटीदारों के लिए आरक्षण की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? क्या अल्पेश को समर्थन देना पाटीदारों के साथ हार्दिक का धोखा देना नहीं है? या फिर अल्पेश वोट के लिए अपनी राजनीति को बदल देंगे? ऐसे में जिग्नेश मेवाणी क्या करेंगे? क्या ये गठबंधन सिर्फ सत्ता की चाहत भर है?

कांग्रेस अगर जीत गई तो फजीहत बढ़ेगी?

कांग्रेस पार्टीदारों को कैसे आरक्षण देगी इस बात का खुलासा नहीं हुआ है। पार्टी जिन युवा नेताओं पर दांव लगा रही है उन सब का अपना वोटबैंक है। ऐसे में अगर कांग्रेस चुनाव जीत गई तो क्या इन नेताओं की राजनीतिक हित आपस में नहीं टकराएंगे? इन तीनों नेताओं की बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने पर क्या कांग्रेस का कायर्कता खुद को ठगा महसूस नहीं करेगा?

कांग्रेस के नए समीकरण ने गुजरात चुनाव को रोमांचक बना दिया है। एक तरफ नरेन्द्र मोदी की साख दांव पर है तो दूसरी ओर राहुल गांधी का राजनीतिक भविष्य। ऐसे में जीत के लिए पहली बार लड़ती दिख रही कांग्रेस के लिए सब जायज नजर आ रहा है। चुनाव में अभी समय है और कई बदलाव होने अभी बाकि… ये जीत 2019 का ट्रेलर होगी… और शायद इसलिए मोदी को गुजरात में हराने के लिए विरोधियों को हर बात जायज लग रही है लेकिन सवाल ये है कि क्या नरेन्द्र मोदी को गुजरात में हराना अभी संभव है….

 

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