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अयोध्या के हिन्दुओं में ऐसा क्या था जिसने बाबर को हैरान कर दिया?

इतिहास के हिसाब से आज का दिन बेहद खास है। आज के ही दिन साल 1526 में पानीपत की लड़ाई जीतने के बाद बाबर ने उस समय भारत की राजधानी अकबराबाद यानि आगरा में प्रवेश किया था। बाबर पहला मुगल शासक था। इसके बाद बाबर ने भारत के कई हिस्सों का सफर किया। इसी कड़ी में वो अयोध्या भी गया था। आज राम मंदिर का जो विवाद हमारे सामने हैं उसकी कड़ियां भी पहले मुगल शासक से जुड़ी हुई हैं।

कहा जाता है कि बाबर जब अयोध्या आया था तब उसने यहां पर बाबरी मस्जिद बनाई थी। बाबर ने अयोध्या में मस्जिद बनवाया था या नहीं ये विवाद का विषय है, लेकिन वो भारत के दूसरे हिस्सों पर आक्रमण करता हुआ अयोध्या ज़रूर आया था। इस बात का जिक्र मुगल शासक ने बाबरनामा में भी किया है।

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बाबर इत्तेफाक से अयोध्या नहीं पहुंचा था बल्कि पूरी योजना बनाकर अयोध्या आया था। भारत में आते ही बाबर यहां की खूबसूरती का कायल हो गया था। भारत के पहाड़, नदी, झील और रेगिस्तानों ने उसे बेहद आकर्षित किया था। पहले मुगल शासक को जब अयोध्या की सुंदरता के बारे में पता चला तो वो खुद को रोक नहीं पाया और अयोध्या के लिए रवाना हो गया।

बाबर ने बाबरनामा में सरयू नदी के बारे में लिखा है। उसने लिखा है कि अयोध्या की सुंदरता देखते ही बनती है। यहां के घर और मकान काठ के बने हैं और सरयू नदी के किनारे फतेहपुर नाम का एक गांव भी है, जो बहुत खूबसूरत है। मुगल शासक ने बाबरनामा में आगे लिखा है कि यहां का प्राकृतिक सौंदर्य दिल को छू लेने वाला है।

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बाबरनामा के एक दूसरे हिस्से में भी बाबर ने सरयू नदी के बारे में लिखा है। मुगल बादशाह लिखते हैं कि आज जुमे का दिन है। हमने सरयू नदी से मछलियां पकड़ी और नदी में नहाया भी। रात का वक्त हो चला था इसलिए सिपाही मशाल लेकर खड़े हुए थे। आगे बाबर ने लिखा है कि उसने मंगलवार को सरयू नदी के किनारे ही ईद भी मनाई। इस पूरे घटनाक्रम में मुगल बादशाह ने अपनी किताब बाबरनामा में सिर्फ एक बार हिन्दुओं का जिक्र किया है। मुगल बादशाह ने लिखा है कि सरयू नदी के किनारे रहने वाले हिन्दू लोग पुनर्जन्म में यकीन करते हैं। कई और जगहों पर भी इस बात का जिक्र मिलता है कि बाबर को पुनर्जन्म की बात हमेशा हैरान करने वाली लगती थी। वो ये सोचता था कि ऐसा क्या है जो हिन्दू पुनर्जन्म पर इतना विश्वास करते हैं।

बाबर और अयोध्या का जब भी जिक्र आता है तो बाबारी मस्जिद लोगों के जुबान पर होती है। बाबर में क्यों राम मंदिर क्यों तुड़वाया या फिर बाबरी मस्जिद क्यों बनवाई इसको लेकर आज भी बस कयास लगाए जाते हैं। लेकिन बाबरनामा पढ़ने के बाद इतना जरूर साफ होता जाता है कि हिंदुओं के गांव में ईद मनाने वाले मुगलशासक को अयोध्या बहुत पसंद थी।

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