Babri Mosque Demolition, बाबरी विध्वंस, Babri Mosque, अयोध्या, Ayodhya, राम लला, Ram Lalla, राम मंदिर, Ram Mandir

बाबरी विध्वंस के 26 साल: 1949 में दिखी एक रौशनी से शुरू हुआ विवाद !

अयोध्या में मौजूद बाबरी मस्जिद आज के दिन ही गिराई गई थी। साल 1992 का वो दिन कोई भूला नहीं सकता। किसी ने उस घटना को टीवी पर देखा था तो किसी ने अखबारों में पढ़ा। लेकिन अयोध्या का ये विवाद आज का नहीं है। उस विवादित ढांचे से जुड़ी कुछ बेहद रोचक कहानियां हैं जिन्हें पढ़कर आप इस पूरे मामले को समझ जाएंगे।

जौहर करने से पहले रतन सिंह से आखिरी बार क्या बोलीं रानी पद्मावती?

जब अलाउद्दीन की एक ‘शर्त’ के सामने झुक गईं रानी पद्मावती!

रानी पद्मावती ने क्यों उतारा था अपना कंगन…. कैसे ये पहुंचा अलाउद्दीन खिलजी के पास?

ये बात उस वक्त की है जब भारत आजाद हो चुका था। आजादी काफी पुरानी नहीं थी, आजादी मिले महज़ दो साल हुए थे। नेता टूटे बिखरे देश को एक सूत्र में पिरोने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन इसी बीच अयोध्या में कुछ ऐसा हुआ जिसने सबकुछ बदल कर रख दिया। ये बात है दिसंबर 1949 की।

22-23 दिसंबर की रात थी। बाबरी मस्जिद में कोई और नहीं था सिवाए एक गार्ड के जिसकी ड्यूटी मस्जिद की सुरक्षा के लिए लगाई गई थी। गार्ड का नाम था अबुल बरकत। बरकत ने अपने सरकारी बयान में उस रात के बारे में बताया- ‘मैं रोज की तरह अपने काम पर था। रात के 2 बज रहे थे। अचानक मस्जिद की एक तरफ चमकदार रौशनी नजर आई। मैंने उसे गौर से देखने की कोशिश की। लेकिन रौशनी तेज होती जा रही थी। मुझे कुछ समझ आता कि उससे पहले मुझे वहां एक छोटा सा बच्चा दिखाई दिया। उसकी उम्र 4-5 साल रही होगी। वो बच्चा बहुत खूबसूरत था। मैंने इतना खूबसूरत बच्चा अपनी जिंदगी में नहीं देखा था।’

साल 1992 में पुलिस फायरिंग में 16 कारसेवकों की मौत हुई थी। वहीं 5 जुलाई 2005 को अयोध्या के रामजन्मभूमि विवादित परिसर पर फिदायीन हमला हुआ था।

बरकत कहते हैं कि बच्चे को इस तरह से देखने के बाद मैं सपने की हालत में चला गया। मुझे नहीं पता मैं कब तक उस हालत में रहा। लेकिन जब मुझे होश आया तो सबकुछ बदल चुका था। मस्जिद का ताला तोड़ा जा चुका था और मस्जिद में हिन्दुओं की भीड़ मौजूद थी। भीड़ में मौजूद लोग एक सिंहासन के चारो तरफ बैठकर भजन गा रहे थे। इस सिंहासन पर एक मूर्ति रखी हुई थी।

इस मामले में FIR दर्ज करवाई गई। FIR में पुलिस स्टेशन के इंचार्ज ने मुख्य रूप से तीन लोगों को नामजद किया था। इनका नाम अभिराम दास, राम शकल दास और सुदर्शन दास था। इसके अलावा 50 से 60 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी दंगा भड़काने, अतिक्रमण करने और एक धर्मस्थल को अपवित्र करने का मामला दर्ज किया गया था। FIR ये दर्ज करवाई गई कि 50-60 लोगों का समूह मस्जिद में घुसा और राम लला की मूर्ति स्थापित कर दी।

बाबरी मस्जिद के विध्वंस को 25 साल हो चुके हैं लेकिन अभी भी इस मामले पर फैसला आना बाकी है

उस दौरान फैजाबाद के सिटी मैजिस्ट्रेट गुरुदत्त सिंह थे। उनके पोते शक्ति सिंह फैजाबाद के बड़े नेता हैं।वहीं गुरुदत्त सिंह के बेटे गुरु बसंत सिंह ने कुछ साल पहले एक डिजिटल मीडिया को दिए इंटरव्यू में इस बात का खुलासा किया था कि रामलला की मूर्ति रखना एक सोची समझी साजिश थी, जो उनके घर पर ही रची गई थी। गुरु बसंत बताते हैं कि..

मैं उस वक्त सिर्फ 15 साल का था। कई बड़े अधिकारी और नेता घर आया जाया करते थे। इनमें जिला मजिस्ट्रेट केके नायर, पुलिस अधीक्षक कृपाल सिंह और जिला जज ठाकुर बीर सिंह शामिल थे। ये लोग किसी भी हाल में राम मंदिर बनवाना चाहते थे। गुरू बसंत कहते हैं कि इन लोगों के कहने पर ही वहां पर मूर्ति रखवाई गई थी। गुरू बसंत ने ये भी कहा था कि आम लोगों को इस मामले से जोड़ने के लिए राम लला की मूर्ति रखवाने की साजिश रची गई थी।

रानी पद्मावती से क्यों नफरत करती थीं राजा रतन सिंह की पहली पत्नी नागमती?

जब एक ‘तोते’ के कहने पर… रतन सिंह ने उठाई रानी पद्मावती पर ‘तलवार’

इस बात से साबित है कि राम मंदिर- बाबरी मस्जिद विवाद नया नहीं है। ये आजादी के जमाने से ही हमारे देश की खाल में धसी फांस जैसा है। मामला कई बार कोर्ट में गया। अब भी मामला सुप्रीम कोर्ट के पास है। इस विवादित ढांचे की जमीन पर किसका हक है ये फैसला तो कोर्ट ही करेगा। लेकिन जरूरत है इन मुद्दों की जड़ तक जाया जाए। ताकि आने वाली पीढ़ी सही और गलत में फर्क समझ कर अपना रूख साफ करे। ताकि धर्म के नाम पर जो घटनाएं भारत में अब तक हुई हैं वो दोबारा न दोहराई जाएं।

Leave a Reply