दिवाली

दिवाली की रात होगी सुप्रीम कोर्ट के फैसले की ‘अग्नि परीक्षा’…

दिल्ली में पटाखों पर प्रतिबंध के फैसले के बाद 2 मजेदार चीज़ें देखने को मिल रही हैं। पहला- जो लोग सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं उनमें से कई ऐसे हैं जो आज भी अफजल गुरु और याकूब मेमन की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को गलत मानते हैं। वहीं दूसरी ओर ऐसे लोग हैं जो इन आतंकियों की फांसी को तो सही मानते हैं लेकिन पटाखों पर प्रतिबंध के खिलाफ हैं। इससे ये तो साफ है कि देश की सबसे बड़ी अदालत वोट बैंक की नहीं बल्कि इंसाफ के लिए काम करती है। लेकिन क्या ये फैसला सही है और क्या दिवाली की रात वही होगा जैसा सुप्रीम कोर्ट ने सोचा है?…

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दिवाली पर आतिशबाजी ने कब पकड़ा तूल?

दरअसल साल 2016 में दिवाली के दूसरे दिन दिल्ली में चारों तरफ SMOG(धुंध) फैल गया। SMOG की वजह से लोगों के आंखों में जलन, सांस लेने में परेशानी और सीने में दर्द होने लगा। केंद्र और दिल्ली सरकार आपस में लड़ने में लगी रही और आम आदमी बेहाल होता रहा। 5 दिनों बाद धुंध छटने लगी और तब जाकर लोगों को थोड़ी राहत मिली।

क्यों फैल गया था चारों तरफ SMOG?

  1. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में Air Laboratory विभाग के प्रभारी डॉ दिपांकर साहा ने एक विदेशी अखबार को बताया कि  साल 2016 में दिल्ली में दिवाली के समय हवा 1.8 मीटर प्रति सेकेंड की तेजी से बह रही थी, जबकि साल 2014 में ये दिवाली के समय 3.4 मीटर प्रति सेकेंड थी। धीमी हवा की रफ्तार की वजह से धूंआ छट नहीं पाया और दिल्ली के वातावरण में जम गया।

  2. मौसम विज्ञान विभाग में प्रभारी आर विशेन ने बताया कि अमूमन दिल्ली में हवा पश्चिम से पूर्व की दिशा में बहती है लेकिन पिछले साल 28 अक्टूबर से दिवाली के कुछ दिनों बाद तक हवा पूर्व से पश्चिम की दिशा में बह रही थी। इसके कारण पटाखों से निकला धूआं छटने के बजाए एक जगह रूक गया।

  3. भारतीय पर्यावरण मंत्रालय ने अपने बयान में कहा था कि अगल-बगल के राज्यों उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में धान के खेतों को जलाने से दिल्ली की हवा में और प्रदूषण फैल गया। साथ ही मंत्रालय ने निर्माण और भारी गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण को भी इसका जिम्मेदार ठहराया था।

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दिल्ली में प्रदूषण के 5 बड़े कारण

  1. फेक्ट्री: साल 2013 में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में एक स्टडी की गई। इस रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में उद्योग और थर्मल पॉवर प्लांट 29 फीसदी प्रदूषण का जिम्मेदार हैं।

  2. निर्माण: दिल्ली और NCR में बड़ी तादात में निर्माण कार्य हो रहे हैं। रेत, सीमेंट और गिट्टी के टुकड़े हवा के साथ दिल्ली के वातावरण में आसानी से फैल जाते हैं। दिल्ली में प्रदूषण का निमार्ण एक बड़ा कारण है।

  3. गाड़ियां: दिल्ली में 70 लाख से ज्यादा गाड़ियां चलती हैं। बाहर से आने वाली गाड़ियां(कार, बस और बड़ी ट्रकें) दिल्ली में और प्रदूषण को फैलाने का काम कर रही हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में प्रदूषण का 63 फीसदी गाड़ियां जिम्मेदार हैं।

  4. पेड़ों का कटना और आबादी: एक रिसर्च के मुताबिक साल 2007 से 2009 के बीच 99,850 हैक्टेयर जमीन पर पेड़ों को काट दिया गया। वहीं जापान की राजधानी टोक्यों के बाद आबादी के मामले में दिल्ली विश्व में दूसरे नंबर पर आती है

  5. फसलों और धान के खेतों को जलाना: अक्टूबर और नवंबर के महीने में पंजाब और हरियाणा में करीब 20 हजार करोड़ टन सूखी घासें, धान या फसलों को जला दिया जाता है। इससे करीब 12 मेगाटन Carbon Dioxide पैदा होता है, जो हवा के रास्ते दिल्ली के वातावरण में शामिल होता है।

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जहां बिना दिवाली के घोषित हुआ रेड अलर्ट

  1. चीन की राजधानी बीजिंग में पिछले साल पिंक और फिर रेड अलर्ट घोषित करना पड़ा। सरकार ने स्कूल से लेकर दफ्तर, कारों और निर्माण पर कुछ दिनों की रोक लगा दी। पानी के फुहारों से हवा में जमे धूल को साफ करने की कोशिश की गई। प्रदूषण के मामले में चीन का हाल पिछले 5 सालों में और खराब हुआ है।

  2. लंदन में साल 1952 में SMOG की वजह से 4000 लोगों की मौत हुई थीये दुनिया की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक मानी जाती है।

पटाखों पर बैन सिर्फ 1 नवंबर तक ही क्यों?

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खड़ा हो रहा सबसे बड़ा सवाल यहीं है कि पटाखों पर सिर्फ 1 नवंबर तक ही प्रतिबंध क्यों? क्या 1 नवंबर के बाद दिल्ली प्रदूषण के मामले में बदल जाएगी? क्या ये उन पटाखा व्यापारियों के साथ धोखा नहीं है जिन्होने सिर्फ दिवाली के लिए पैसे लगाए थे? क्या ये उन छोटे दुकानदारों के साथ नाइंसाफी नहीं है जो दिवाली के दिन कुछ पटाखों को बेचकर अपनी दिवाली मना लिया करते हैं।

शादी के सीजन में हर तरफ पटाखे बजाए जाएंगे उनपर प्रतिबंध क्यों नहीं लगा(शादी तो हर धर्म में शामिल है)। क्या इस बार नए साल पर आतिशबाजी से दिल्ली में प्रदूषण नहीं फैलेगा?

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कहीं इस बार दिवाली पर आतिशबाजी और हुई तो?

  1.  क्या प्रतिबंध के बाद इस बार दिल्ली की आतिशबाजी में कमी आएगी?

  2. क्या पटाखों के शौखिन NCR के बाहर से पटाखे लेकर नहीं आएंगें?

  3. क्या इस बार लोग गुस्से में और भी आतिशबाजी करेंगे?

  4.  क्या पटाखों की ब्लैक मार्केटिंग का खतरा बढ़ गया है?

  5. नाराज व्यापारी क्या करेंगे?

ये सच है कि दिवाली में पटाखों और आतिशबाजी का जिक्र कहीं नहीं है। दिवाली दीपों का त्योहार है, खासकर सरसों के तेल का, जिसमें जल कर कीड़े मर जाते हैं और दीप की महक से वातावरण साफ हो जाता है। लेकिन इस हकीकत को भी नहीं नकारा जा सकता की जिन वजहों से दिवाली पर पटाखों को बैन किया गया है वो वजह आज भी वैसे ही मौजूद हैं जिनपर न तो लोग सोच रहे हैं और न ही सरकार। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अग्नि परीक्षा तो दिवाली की रात को है….

नोट: अगले अंक में हम आपको बताएंगे कि दिवाली में पटाखों पर प्रतिबंध से क्या हो सकता है नुकसान?

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