बिहार की राजनीति में सुनामी है CBI की रेड

बिहार की राजनीति में सुनामी है CBI की रेड

बिहार में महागठबंधन की सरकार बनने के बाद से लगातार यही सवाल उठते रहे कि क्या सरकार राज्य में 5 साल पूरे कर पाएगी? सवालों का ये दौर सरकार बनने के 7 दिन के अंदर ही उठना शुरू हो गया, जब बिहार में 3 इंजीनियरों की हत्या का मामला तूल पकड़ने लगा। एक तरफ जहां शराब बंदी के फैसले पर नीतिश कुमार तारीफ बटोर रहे थे तो वही दूसरी ओर लॉ एंड आर्डर और शिक्षा व्यवस्था की खस्ता हाल पर सरकार लाचार नजर आ रही थी। कहा तो ये भी जाने लगा कि नीतीश के विकास पर RJD नेताओं की करतूतें भारी पड़ने लगी हैं। विपक्ष नीतीश को महागठबंधन की कठपुतली बताने लगा और बिहार राज को ‘जंगल राज’ कहा जाने लगा। महागठबंधन के अंदर कई बार विवाद उठते रहे जैसे की सुशील मोदी के बुलावे पर JDU के विधायकों का जाना। ये बात अलग है कि दोनों पार्टियों ने सिर्फ इसे राजनीतिक शिष्टाचार बताया।

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दरअसल महागठबधन की नीव तब पड़ी थी जब बीजेपी को दिल्ली और बिहार में करारी शिक्सत झेलनी पड़ी। इसके बाद अमित शाह से लेकर प्रधानमंत्री मोदी तक की रणनीति पर सवाल उठने लगे। पार्टी के अंदर एक बड़ा तबका चाहता था कि अमित शाह की रणनीति की जगह दूसरी रणनीति पर काम किया जाए। बिहार चुनाव के बाद बीजेपी ने अपनी रणनीति बदली भी लेकिन अमित शाह पर भरोसा जताए रखा। बीजेपी को इसका फायदा भी मिला जहां दूसरे राज्यों में पार्टी ने शानदार वापसी की और कई राज्यों में पूर्ण बहुमत की सरकार भी बनाई। इन राजनीतिक घटनाओं के बीच एक बात जो सुर्खियां बटोरती रही वो थी नीतीश और मोदी का एक दूसरे के फैसलो की सराहना करना जैसे

  • नीतीश ने सर्जिकल स्ट्राइक के बाद सरकार का खुलकर समर्थन किया

  • नोटबंदी पर सरकार के फैसले को नीतीश ने साहसिक कदम बताया

बीजेपी का हृ्दय परिवर्तन

  • बीजेपी  ने नीतीश सरकार के शराबबंदी फैसले की तारीफ की

  • बीजेपी नीतिश की जगह लालू यादव और उनके परिवार के खिलाफ आक्रमक दिखी

लेकिन महागठबंधन पर तो असली गाज अभी गिरने वाली थी। 16 मई को बेनामी संपत्ति मामले में लालू और उनके परिवार के 22 ठिकानों पर इनकम टैक्स ने छापे मारे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक माना जा रहा है कि ये छापे 1000 करोड़ की बेनामी संपत्ति के मामले में हुए। लालू के दामाद और बेटी को पूछताछ के लिए कई बार बुलाया गया।

खास बात ये थी कि जब यादव परिवार पर इनकम टैक्स के छापे पढ़ रहे थे उस समय लालू यादव ट्वीट कर रहे थे।

लालू यादव के इस ट्वीट के बाद तो जैसे घमासान ही मच गया। लालू ने Partner किसे कहा, क्या ये नीतीश कुमार की तरफ इशारा है? क्या नीतीश लालू का साथ छोड़ देंगे? और क्या नीतीश और बीजेपी का गठबंधन होगा?  ये सवाल इस ट्वीट के बाद मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों में फैल गया। इस अफरा-तफरी के बीच शायद लालू यादव को अपनी गलती का एहसास हुआ जिसके 40 मिनट बाद उन्होने एकऔर ट्वीट किया।

इस ट्वीट ने माहौल तो शांत कर दिया लेकिन अटकले बनी रही। इन अटकलों को नीतीश के फैसलों समय-समय पर बल भी दिया जहां

  1. नीतीश कुमार ने राष्ट्रपति पद के लिए NDA उम्मीदवार रामनाथ कोविंद का समर्थन करके विपक्ष को हैरान कर दिया

  2. लालू यादव की होने वाली रैली बीजेपी हटाओ देश बचाओमें JDU का शामिल नहीं होना, लालू के लिए सबसे बड़ा झटका है

इसके बाद दोनों  पार्टियों के बीच जमकर बयानबाजी भी हुई लेकिन तब तक लालू समझ चुके थे कि गठबंधन के तराजू में उनका भार कम हो चुका है। लेकिन 7 जुलाई को लालू यादव के 12 ठिकानों पर हुई CBI रेड ने लालू की साख और उनकी पार्टी RJD के भविष्य को ही खतरे में डाल दिया।

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लालू पर आरोप है कि रेलमंत्री रहने के दौरान उन्होंने रांची और पुरी के चाणक्य बीएनआर होटल को अपने करीबियों को लीज़ पर बेच डाला था। ये दोनों होटल रेलवे के हेरिटेज होटल थे जो कि अंग्रेजों के जमाने के थे। अब इनका कोई महत्व नहीं है क्योंकि इन होटल्स को पूरा रेनोवेटेड कर दिया गया है।

इस पूरे मामले में लालू, उनकी पत्नी रावड़ी, और बिहार के मौजूदा उप- मुख्यमंत्री तेजप्रताप और तेजस्वी के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है। विकास और सुशासन की बात करने वाले नीतीश के लिए अब ये अग्नि परीक्षा से कम नहीं है क्योंकि ये वही केस है जिसकी मांग नीतीश ने 2006 में किया था। विपक्ष पहले से ज्यादा हावी हो चुका है और गठबंधन कमजोर। फैसला अब नीतीश के हाथ में है कि क्या वो भ्रष्टाचार के 2 आरोपी उप मुख्यमंत्रियों के साथ सरकार चलाएंगे या फिर उनके बगैर। ये सवाल सुनामी है बिहार की राजनीति पर जिससे नीतीश कैसे बचेंगे अब यही देखना है…..

 

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Shridhar Mishra

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