एक मौलवी के फतवे के सामने झुक गई बिहार सरकार

एक मौलवी के फतवे के सामने झुक गई बिहार सरकार

बिहार में नीतीश कुमार ने जब महागठबंधन तोड़ा तो यही दलील दी गई ये फैसला बिहार के विकास के लिए जरूरी था। राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप कर जब नीतीश बाहर आए तो उन्होने बताया कि कैसे RJD उन्हें काम करने नहीं दे रही थी। नीतीश ने ये भी कहा कि उनका फैसला राजनीतिक स्वार्थ नहीं बल्कि बिहार के हित में है। बिहार के लिए नीतीश कुमार की चिंता को ऐसे भी समझा जा सकता है कि उनकी पार्टी ने आधी रात को ही बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया। 18 घंटे से भी कम समय में नीतीश कुमार ने शपथ ली और इस तरह बिहार को मिल गया उसका नया मुख्यमंत्री…

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लेकिन क्या ये मुख्यमंत्री बिहार बिहार के कानून और देश के संविधान को भूल गया है? ये सवाल इस लिए खड़ा हो रहा कि क्योंकि विकास के नाम पर आई ये सरकार अब वोट बैंक की राजनीति करने लगी है। दरअसल बिहार सरकार के एक मंत्री खुर्शीद अहमद ने विधानसभा में जय श्रीराम का नारा लगाया था। इसी को लेकर जब मीडिया ने उनसे शनिवार को सवाल किया तो उन्होने कहा कि इसमें हर्ज क्या है।

क्या कहा था खुर्शीद अहमद ने?

  • अगर बिहार के प्रगति और लोगों के विकास के लिए सुबह-शाम श्रीराम का नारा लगाना पड़े तो वो पीछे नहीं हटेंगे।

  • खुर्शीद ने बताया कि वो जहां रहते हैं वहां अब तक उन्होने 28 मंदिर बनवाएं हैं

  • बिहार के विकास के लिए उन्होने मंदिर में मन्नत भी मांगी थी, जिसका असर हो गया

खुर्शीद के बयान के बाद तो जैसे बिहार के राजनीतिक गलियारे में सुनामी ही आ गई। हर जगह खुर्शीद के बयान पर सवाल उठाए जाने लगे। ऐसे में भला धार्मिक ठेकेदार कैसे चुप रह सकते थे। बिहार के एक मौलाना ने तो बकायदा एक फतवा जारी किया जिसमें उन्होने खुर्शीद को इस्लाम धर्म से ही बाहर कर दिया।

फतवे में मौलाना ने लिखा

  • जो मुसलमान श्रीराम का नारा लगाए और कहे कि मैं राम के साथ रहीम की भी पूजा करता हूं, मैं हिंदुस्तान के सभी धार्मिक स्थल पर माथा टेकता हूं, ऐसा इंसान इस्लाम से खारिज है।

  • ऐसे इंसान की बीवी निकाह से खारिज हो गई है

  • ऐसे शख्स पर दोबारा इमान और निकाह और माफी लाजिमी है

  • जब तब ऐसा इंसान तौबा न करे दूसरे मुसलमानों के लिए उससे किसी भी तरह के ताल्लुकात शरिया के मुताबिक जायज़ नहीं है

  • ऐसे शख्स से बचे और दूसरे मुसलमानों को भी बचाएं

नीतीश ने अपने मंत्री से मंगवाई माफी

मौलवी से माफी मांगते हुए मंत्री खुर्शीद अहमद

हैरत इस बात कि नहींं है कि भारत जैसे देश में ऐसा फतवा जारी कैसे हो गया। हैरत ये भी नहीं कि ऐसे तालिबानी फतवे पर प्रशासन ने चुप्पी क्यों साधी। और हैरानी ये भी नहीं है कि ऐसा फतवा जारी करने के बाद भी मौलाना साहब पर कोई कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? हैरानी तो ये है कि विकास के नाम पर आई सरकार के मुखिया और राज्य के मुख्यमंत्री ने एक बैठक के बाद खुर्शीद अहमद को अपने बयान के लिए माफी मांगने को कहा।

इस्लाम में दोबारा दाखिले के लिए मंत्री ने पढ़ा कलमा

मुख्यमंत्री की बात भला कोई मंत्री केसे टाल सकता था खासकर जब बात उसूलों की नहीं वोटबैंक की हो। नीतीश के बोलने के बाद खुर्शीद अहमद इमारत-ए-शरिया के दफ्तर पहुंचे। उन्होने माफी मांगी और इस्लाम में दोबारा दाखिले के लिए कलमा पढ़ा। खास बात ये रही कि खुर्शीद ने उस मौलाना से माफी मांगी जिसने खुर्शीद को ये कहा थी कि वो चमचा गिरी में अपना इमान बेच गए हैं। क्या मौलाना से ये नहीं पूछना चाहिए था कि सभी धर्मों का सम्मान करना इमान को बेचना होता है?

ये वोटबैंक नहीं तो क्या है?

नीतीश कुमार ने इस्तीफा देने की बात कही थी कि महागठबंधन को तोड़ना वोटबैंक की राजनीति नहीं है। क्या नीतीश बताएंगे की एक मंत्री का फतवे के बदले मौलवी से माफी मांगना वोटबैंक की राजनीति नहीं तो क्या है? क्या नीतीश को नहीं पता कि एक मंत्री का झुक जाना एक सरकार के झुक जाने के बराबर है। क्या नीतीश को ये नहीं पता कि इससे उन दूसरे मुसलमानों पर क्या असर पड़ेगा जो दखियानूसी विचारधारा को नहीं मानते।

नीतीश कुमार ये सब जानते हैं और उनके राज्य में ये घटना किसी पाप से कम नहीं। एक ऐसा पाप जिसकी माफी न तो श्रीराम के पास है और न ही अल्लाह के पास….
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Shridhar Mishra

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