मौत के जिम्मेदार तो कई हैं लेकिन सरकार की बेशर्मी जले पर नमक छिड़कने जैसा है

मौत के जिम्मेदार तो कई हैं लेकिन सरकार की बेशर्मी जले पर नमक छिड़कने जैसा है

आज से 3 साल पहले पाकिस्तान के एक स्कूल में आतंकी हमले में 140 बच्चों की मौत हो गई थी। बच्चों की मौत का गम इतना था कि सरहद पार हिन्दुस्तान में लोगों ने इसका मातम मनाया। 3 साल बाद ये घटना एक बार फिर हुई है लेकिन इस बार पाकिस्तान में नहीं बल्कि हिन्दुस्तान के गोरखपुर में….

गोरखपुर के BRD मेडिकल कॉलेज,हॉस्पिटल में पिछले 5 दिनों में 60 से भी ज्यादा बच्चों की मौत हो गई। अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि बच्चों की मौत अस्पताल में ऑक्सीजन की सप्लाई कटने से हुई। इनमें से अधिकतर बच्चे दिमागी बुखार से पीड़ित थे। ये घटना जितनी डरावनी है उससे भी ज्यादा डरावना है यहां का इतिहास..

4 दशकों में जा चुकी है हजारों जान

गोरखपुर में पिछले कई सालों से ये समस्या बढ़ती जा रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 1978 से अबतक 80 हजार से ज्यादा बच्चों की गोरखपुर के इसी BRD मेडिकल कॉलेज,हॉस्पिटल में मौत हुई है।

उत्तर प्रदेश के 7 जिले और बिहार के 3 जिलों में मानसून सीजन में हर साल मस्तिषक ज्वार(इंसेफ्लाइटिस) से 700 -800 बच्चो की मौत हो जाती है। तक़रीबन 3 करोड़ की आबादी वाले पूर्वांचल में लोग इस एक मात्र अस्पताल पर निर्भर हैं।

चुनावी मुद्दा भर बन कर रह गई बीमारी

इन चुनावों में दिमागी बुखार को बड़ा मुद्दा बनाया गया था। पुरानी सरकार पर जमकर हमले किए गए। लेकिन हकीकत तो ये है कि मौजूदा सरकार में भी वही रवैया अपनाया गया जो पिछली सरकारों में चलता आया है। गंदगी आज भी इन इलाकों में पसरी हुई है जो मौत का कारण बन रही है। अस्पताल की खस्ता व्यवस्था और सरकार की बेरूखी का दंश बच्चों की मौत का कारण बन रही है।

सरकार का सरकार का ध्यान?

गोरखपुर के अस्पताल में 9 अगस्त को ही बच्चों की मौत होनी शुरू हो गई थी। 9 अगस्त से 10 अगस्त के बीच ही 23 बच्चों की मौत हो चुकी थी। प्रशासन और सरकार की बेफिक्री का आलम ये था कि मुख्यमंत्री योगी ने खुद 9 अगस्त को इस अस्पताल का दौरा किया था। लेकिन सरकार के नुमाइंदों का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ऑक्सीजन सप्लाई के बारे में कोई जानकारी दी ही नहीं गई।

ऐसा क्यों? शायद इसलिए क्योंकि सीएम योगी जो देखना चाहते थे उन्हें वही दिखाया गया। या फिर इसलिए भी क्योंकि योगी सरकार का ध्यान तो इस बात पर था कि 15 अगस्त पर मदरसों में तिरंगा फैराया जाएगा या नहीं। वहां राष्ट्रगान होगा या नहीं।

सरकार का बेशर्मी वाला बयान

शनिवार को जब मृतक बच्चों का आंकड़ा 60 के पार गया तो मीडिया की नींद टुटी। वो भी शायद इसलिए क्योंकि शनिवार था और दूसरी खबरें नहीं थीं। इसके बाद आनन-फानन में योगी सरकार ने दो मंत्रियों सिद्धार्थ नाथ सिंह और आशुतोष टंडन को गोरखपुर भेजा। वहां जाकर कई घंटों तक अधिकारियों के साथ बैठक चली। बाद में प्रेस कांफ्रेंस में ये मंत्री भी पुरानी सरकार पर हमला करने के मोड में ही नज़र आए।

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बेशर्मी की हद तो तब हो गई जब इन मंत्रियों की तरफ से कहा गया कि पिछले कई सालों से अगस्त में प्रतिदिन गोरखपुर में 19 बच्चों की मौत होती है। बच्चों की मौत पर सरकार की तरफ से कहा गया कि ये मौत ऑक्सीजन की कमी के चलते नहीं बक्लि अलग-अलग कारणों से हुए।

अगर मौत की वजह ये नहीं है तो सरकार के मंत्रियों की तरफ से ये क्यों कहा गया कि ऑक्सीजन की कमी के बारे में सीएम योगी को नहीं बताया गया। उलटा मंत्रियों की तरफ से हड़बड़ाहट में ये कह दिया गया कि अब अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी नहीं है।

क्या फिर दब जाएगा मुद्दा

नींद में सो रही मीडिया आज इंसाफ की बात कर रही है। लेकिन ये इंसाफ TRP की जंग में कब गायब हो जाएगा शायद ये बात टीवी चैनलों के एंकर्स भी नहीं जानते होंगे।

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क्या भविष्य में ऐसी घटनाएं दुबारा कभी नहीं होंगी? क्या सरकारी अस्पतालों का रवैया बदलेगा? ये वो सवाल हैं जिनका न तो कोई जवाब है और न ही कोई गैरेंटी… जिस राज्य में मुख्यमंत्री पार्क बनवाने में हजारो करोड़ खर्च कर देते थे, पार्क में साप पकड़ने के लिए 12 करोड़ खर्च कर डालते थे.. उसी राज्य में गोरखपुर सालों से बच्चों की मौत देखते आया है..

60 बच्चों की मौत कोई हादसा नहीं बल्कि हत्या है… हत्यारों की तलाश जारी है( खासकर तब तक जबतक बलि का बकरा न मिल जाए) लेकिन अगर हम इस घटना को आंख बंद कर भूल गए तो हत्यारे हम भी कहलाएंगे….

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