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कैसे भारत-पाकिस्तान के झगड़े से लेकर ‘जिया उल हक’ की मौत का कारण रह चुका आम?

गर्मियां आ गईं हैं और इसी के साथ फलों के राजा आम का सीज़न भी शुरू हो गया है। आम के नाम से जितनी कहावतें जुड़ी हुईं हैं  उतने ही इसके प्रकार भी हैं। लंगड़ा, चौसा, दशहरी, बीजू, सफेदा, तोतापरी और भी कई सारे। इसी तरह आम के साथ कई मशहूर कहानियां भी जुड़ी हुई हैं। गर्मियों के इस मौसम में हम आपको ऐसी ही कुछ हटकर कहानियों के बारे में बताने जा रहे हैं।

बड़ा पुराना है फलों का राजा

आम का इतिहास भारत में काफी पुराना माना जाता है। कहा जाता है कि आज से लगभग 5000 साल पहले आम की उत्पत्ति पूर्वी भारत और म्यांमार में हुई। बाद में जब चीन के यात्री भारत आए तब उन्होंने इस फल को देखा और फिर आम को दूसरे देशों तक पहुंचाने का काम किया। हालांकि कहा जाता है कि अमेरिका तक आम 1880 के बाद पहुंचा। तब तक आम भारत में बहुत लोकप्रिय हो चुका था और यहां पर इसकी कई किस्में सामने आने लगी थीं।

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ऐसे पड़ा नाम ‘दशहरी’

अब बात करते हैं आम की सबसे मशहूर किस्म दशहरी की। आखिर इसका नाम दशहरी पड़ा कैसे? इसके पीछे एक काफी रोचक कहानी है। बात लगभग 300-400 साल पुरानी है। उन दिनों मलीहाबाद के व्यापारी आम बेचने के लिए लखनऊ जाया करते थे। एक बार जब वो माल बेचने के लिए लखनऊ पहुंचे तो मालगुज़ारी को लेकर झगड़ा हो गया। व्यापारियों ने गुस्से में आकर सारे आम सड़क के किनारे फेंक दिए। कहीं गुठली गिरी तो कहीं आम। कुछ दिनों के बाद उन गुठलियों की वजह से ही ज़मीन में आम के पौधे निकल आए। इन्हें दशहरी गांव के बाहर लगा दिया गया। जब पेड़ बड़ा हुआ और इसमें फल आए तो नवाब साहब को इस फल का स्वाद बेहद पसंद आ गया। उन्होंने इसका नाम दशहरी आम रख दिया।

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नवाब को भी डर था कहीं चोरी न हो जाए आम

अब ये आम का पेड़ फलों से लद गया था। बाहर के लोग भी इस पेड़ से फल लेकर जाया करते थे। लेकिन नवाब साहब को डर था कि कहीं उनका ये फल दूसरी जगह भी न पैदा होने लगे। ऐसे में जब भी ये फल किसी बाहर वाले व्यक्ति को दिया जाता था, तो उसमें से गुठली निकाल दी जाती थी। ताकि ये पेड़ कहीं और पैदा न हो सके।

जब आम पर भिड़े भारत-पाकिस्तान

ये उन दिनों की बात है जब भारत में इंदिरा गांधी और पाकिस्तान में जिया उल हक सत्ता में थे। जिया उल हक ने आम की दो पेटियां इंदिरा गांधी को भेजीं। आम भेजना एक तरह से दोस्ती का प्रतीक माना जाता है। इंदिरा को ये आम बेहद पसंद आए। जिया उल हक ने कहा कि ये अनवरी रटौल आम है। इंदिरा को आम इतना पसंद आया कि उन्होंने अपने ही देश में इसकी जमकर तारीफ कर डाली। लेकिन भारत में इसका विरोध होने लगा। कहा जाने लगा कि पाकिस्तान झूठ बोल रहा है रटौल आम तो मेरठ में होता है। फिर क्या जो दो पेटी आम दोस्ती के लिए भेजे गए थे उसी को लेकर भारत और पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भिड़ गए।

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जिया उल हक- दाईं ओर

आम के चक्कर में मारे गए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री

हालांकि जनरल जिया उल हक का आम प्रेम ही उन्हें ले डूबा। एक बार वो फ्लाइट से कहीं जा रहे थे। फ्लाइट हवा में ही थी कि ज़ोरदार धमाका हुआ और विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में जिया उल हक की मौत हो गई। पाकिस्तानी जांच एजेंसियों ने जब जांच की तो पता चला कि इस हादसे की बड़ी वजह आम की पेटियां थीं। इन पेटियों में आम के बीच में बम भरकर फ्लाइट में रखे गए थे। इसी घटना पर पाकिस्तान के एक पत्रकार हनीफ मोहम्मद ने एक किताब भी लिखी।

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