भारत के दुश्मनों के लिए खतरे की घंटी है मोदी की इजरायल यात्रा

भारत के दुश्मनों के लिए खतरे की घंटी है मोदी की इजरायल यात्रा

प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र मोदी जिस देश में भी गए वहां उनका भव्य स्वागत हुआ। अमेरिका का ऐतिहासिक ‘मेडिसन स्वायर’ हो या नीदरलैंड्स का ‘द हेद’ मोदी की दीवानगी लोगों में जुनून के हद तक दिखी। इस दौरान अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के संसद में भी मोदी ने कई ऐतिहासिक भाषण दिए जहां मंझे हुए नेताओं के बीच भी उनकी लोकप्रियता देखने को मिली। कुल मिला कर सीधी भाषा में कहा जाए तो नरेन्द्र मोदी की हर विदेश यात्रा से उनका कद, शख्सियत और लोकप्रियता बढ़ी है।  दुनिया अब मोदी को भारत के प्रधानमंत्री से ज्यादा ग्लोबल लीडर के रूप में देखती है। मोदी पिछले सभी प्रधानमंत्रियों से अलग हैं, वो विदेश मंत्री के बजाए खुद जा कर दूसरे देशों से संबंध मजबूत करते हैं। वो एक नेता की तरह नहीं बल्कि एक दोस्त की तरह दूसरे राष्ट्राध्यक्षों से मिलते हैं। मोदी बड़े और छोटे देशों में अंतर नहीं करते, बल्कि छोटे देशों पर तो काफी महरबान भी हो जाते हैं।

छोटे देशों से दोस्ती का क्या हुआ फायदा

  1. छोटे देशों के समूह को मिला कर भारत ने पाकिस्तान में होने वाले SAARC समिट का बहिष्कार किया।

  2. बांग्लादेश के साथ मजबूत संबंध से चीन और पाकिस्तान की चिंता बढ़ गई है।

  3. अफगानिस्तान और भारत की दोस्ती से जहां पाकिस्तान कमजोर हुआ है, वहीं

  4. अफगानिस्तान-भारत की दोस्ती को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सराहा है।

वैसे वो मोदी के हर विदेश दौरे ने अखबारों की सुर्खियां बटोरी हैं लेकिन इजरायल का दौरा अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक दौरा माना जा रहा है। इजरायल में मोदी की यात्रा का महत्व इस बात से लगाया जा सकता है कि जब मोदी अमेरिका दौरे पर थे तब इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू उनके स्वागत में एक के बाद एक ट्वीट कर रहे थे

मोदी की यात्रा से कुछ घंटे पहले इजरायल के प्रधानमंत्री ने उन्हें अपना दोस्त और भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बताया। अपने ट्वीट में उन्होंंने भारत के किसी भी प्रधानमंत्री के पहले इजरायल  दौरे की बात भी कही

नेतन्याहू ने अपने अगले 2 ट्वीट में बताया कि वो प्रधानमंत्री मोदी के साथ कई कार्यक्रमों में रहेंगे और दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच सुरक्षा, कृषि, जल, ऊर्जा और आतंकवाद पर चर्चा होगी।

दोनों देशों के बीच ये गर्म जोशी दरअसल एक नई राजनीति और कूटनीति को जन्म दे रही है।

प्रधानमंत्री मोदी का इजरायल दौरा क्यों है खास?

  • भारत के किसी भी प्रधानमंत्री का इजरायल में ये पहला दौरा है।

  • भारत और इजरायल के कूटनीतिक संबंधों की सिल्वर जुबली।

  • पोप और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बाद मोदी ऐसे पहले नेता है जिनका इजरायल में भव्य स्वागत होगा।

दोनों देशों के बीच की मुलाकात को मीडिया जगत में भी सुर्खियां मिली हैं। इजरायल के एक मीडिया संस्थान ने तो यहां तक लिखा कि- जागो, दुनिया के सबसे अहम प्रधानमंत्री इजरायल आ रहे हैं। ऐसे में इजरालय को भी इस मुलाकात से काफी उम्मीदें हैं…

इजरायल के लिए मोदी का दौरा क्यों खास है?

  1.  भारत के किसी भी प्रधानमंत्री का इजरायल में ये पहला दौरा है- भारत की आजादी के बाद से भारत इजरायल का समर्थन करते तो आया है लेकिन आज तक कोई प्रधानमंत्री इजरायल नहीं गया। इससे दोनों देशों के बीच दौस्ती वैसी नहीं रही जैसा की आज है।

  2.  विश्व के किसी भी ग्लोबल लीडर का फिलीस्तीन न जाना- इजरायल के लिए प्रधानमंत्री मोदी का ये दौरा सबसे खास शायद इसी वजह से है भी। क्योंकि   मोदी इजरायल के ‘तेल हवीव’ तो जाएंगे लेकिन फिलीस्तीन के ‘रमल्लाह’ नहीं जाएंगे। दरअसल इजरायल और फिलीस्तीन के बीच संबंध काफी खराब है। दशकों से चल रही लड़ाई में लाखों जाने जा चुकी हैं। ऐसे में मोदी का फिलीस्तीन नहीं जाना, इजरायल इसे कूटनीति सफलता की तरह देख रहा है। मोदी के इस फैसले से माना जा रहा है कि इजरायल की भारत के प्रति जो दोस्ती होगी वो दूसरे देशों के मुकाबले कहीं ज्यादा होगी। इसकी छाप इजरायल की मेजबानी में दिख भी रही है।

  3. व्यापार सौदा- भारत दुनिया के लिए सबसे बड़ा बाजार है और इजरायल दुनिया में तकनीक और हथियारों की सप्लाई करने वाला बड़ा देश। ऐसे में व्यापार के नजरिए से भारत इजरायल के लिए एक बड़ी मछली है।

  4. आतंकवाद – भारत हमेशा से दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ लड़ने की सलाह देता आया है ऐसे में इजरायल की आतंकवाद के खिलाफ ZERO TOLERANCE की पॉलिसी दोनों देशों के रिश्तों में मजबूती लाएगी।

  5. यहूदियों को आरक्षण- माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा में भारत में रह रहे यहूदियों के लिए कोई सौगात दे सकते हैं। यहूदियों को अल्पसंख्यक के दर्जे के तहत आरक्षण भी दिया जा सकता है।

भारत के नजरिए से क्या खास है इस दौरे में?

इजरायल के समर्थन से भारत कूटनीतिक रूप से और मजबूत होगा

  1. खुफिया तंत्र को मिलेगी मजबूती- इजरायल का मोसाद दुनिया का सबसे बड़ा खुफिया तंत्र है। भारत इजरायल के खुफिया तंत्र की मदद से पाकिस्तान और चीन के लिए अलग रणनीति तैयार कर सकता है।

  2. रुस की तरह वफादार हो सकता है इजरायल- राजनीतिक विषेशज्ञों के मुताबिक इजरायल की भारत से दोस्ती रुस की तरह हो सकती है।

  3. बड़े मंचों पर मिलेगा समर्थन- इजरायल भारत के NSG और संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत की स्थायी सदस्यता की वकालत करता रहा है। चीन के रवैये के बाद ये समर्थन और भी जरुरी हो जाते हैं।

  4. मजबूत देशों का गठबंधन- भारत की फ्रांस, ब्रिटेन, अमेरिका,रूस और इजरायल की दोस्ती से जहां चीन की दादागिरी पर लगाम लगेगा वहीं सउदी अरब, ईरान, और संयुक्त अरब इमारात से बढ़ती दोस्ती से पाकिस्तान अलग-थलग पड़ेगा। ऐसे में पाकिस्तान और चीन की जोड़ी को बड़े देशों की कूटनीति से कमजोर किया जा सकता है।

  5. चीन की घेराबंदी- मोदी और ट्रंप की मुलाकात को चीन के लिए एक संदेश के तौर पर देखा गया। ऐसी अटकलें भी हैं कि चीन और भारत के बीच युद्ध के ंमौके पर इजरायल भारत को समर्थन करेगा। ये कूटनीति पहल की जीत ही है कि भारत अपने समर्थन में रूस और अमेरिका का साथ ला पा रहा है।

  6. तकनीक और सुरक्षा स्तर पर मिलेगी मजबूती- मेक इन इंडिया के कार्यक्रम को इजरायल की तकनीक से मजबूती मिलेगी और सुरक्षा पर करार से सैन्य ताकत।

मोदी को इजराइल पसंद है

देश में NDA की सरकार बनने के बाद से केंद्र सरकार का रवैया अपने दुश्मनों के लिए ZERO TOLERANCE का रहा है।

  1. मोदी को पसंद है इजरायल का तरीका- नरेन्द्र मोदी और उनके नेताओं के भाषण में कई बार इजरायल का उदाहरण सुनने को मिलता है। खुद प्रधानमंत्री मोदी इजरायल के सैनिकों से अपने जवानों के तुलना करते दिखे हैं फिर वो सर्जिकल स्ट्राइक के बाद का दिया भाषण हो या कश्मीर में आतंकियों के सफाए की बात।

  2. मोदी सरकार को ZERO TOLERANCE पसंद है- मोदी इजरायली पॉलिसी के तहर ही काम करना पसंद करते हैं। इसका उदाहरण बिपिन रावत को सेना प्रमुख बनाकर पता चलता है। केंद्र की सरकार में सर्जिकल स्ट्राइक हुए, ब्लूचिस्तान का मुद्दा उठाया गया। कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ सख्ती के तहत बुरहान वानी समेत लश्कर कमांडर और हिजबुल के आतंकियों को मौत के घाट उतारा गया। सरकार बातचीत के रास्ते के साथ सेना की कार्रवाई को जारी किए हुए है।

मुश्किल दौर का साथी है इजरायल

  • 1962 में भारत-चीन की जंग में भारत ने इजरायल से हथियार खरीदे थे

  • 1965,1971 में भारत-पाकिस्तान की जंग में भी इजरायल ने हथियार दिए थे

  • ब्रिटेन, अमेरिका और फ्रांस में प्रतिबंध के बीच भी इजरायल भारत को हथियार बेचने के लिए तैयार था

  • भारत की सुरक्षा एजेंसी RAW और इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के बीच 1960 से एक दूसरे का साथ दे रही हैं

    कुल मिला कर देखा जाए तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का दौरा न सिर्फ दोस्ती बल्कि कूटनीतिक तौर पर भी अहम है। ऐसे में अगर ये दौरा सफल रहा तो इतिहास के पन्ने में ये यात्रा हमेशा के लिए अमर हो जाएगी।

 

Haripriya Mishra

Haripriya Mishra

I Believe We All Can Find God But It Is Up to The Questions We Ask. God Himself Answers The Toughest Of The Questions.

An Atheist By Profession And A Believer By Heart.

Writer| Journalist| Engineer|
Haripriya Mishra

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