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अकबर की जिद और नूरजहां के प्यार में कैसे जहांगीर सुल्तान से कातिल बन गया?

मुगल शासक जहांगीर का नाम आपने इतिहास की किताबों में बहुत पढ़ा होगा। जहांगीर का जिक्र जब भी किया जाता तो नूरजहां का नाम जरूर आता है। नूरजहां जहांगीर की पत्नी थीं। लेकिन इन दोनों की प्रेम कहानी भी अनोखी थी। नूरजहां किसी और की पत्नी थीं और जहांगीर ने उसे पाने के लिए उसके पति तक का खून करवा दिया था।

नूरजहां का असली नाम मेहरून्निसा था। नूरजहां और जहांगीर ने एक दूसरे को पहली बार एक बगीचे में देखा था। जहांगीर ने जैसे ही नूरजहां को देखा तो वो उसकी तरफ अपने आप ही आकर्षित हो गए। वो नूरजहां के पास गए और उन्हें दो कबूतर पकड़ने को कहा। नूरजहां ने कुछ देर तक उन दोनों कबूतरों को पकड़ कर रखा। लेकिन कुछ ही देर में एक कबूतर अपने आप उड़ गया।

जहांगीर जब वापस आए तो देखा तो वहां एक कबूतर नहीं था। उन्होंने मेहरून्निसा से पूछा एक कबूतर कहां गया? तो मेहरून्निसा ने कहा उड़ गया। जहांगीर ने फिर पूछा कबूतर कैसे उड़ गया… मेहरून्निसा समझ नहीं पा रही थीं कि एक ही सवाल का बार-बार क्या जवाब दिया जाए। इसलिए उन्होंने दूसरे कबूतर को उड़ाते हुए कहा.. ऐसे उड़ गया।

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जहांगीर को मेहरून्निसा की ये मासूमियत बहुत पसंद आई। उन्होंने मन बना लिया कि वो इसी लड़की से शादी करेंगे। मेहरून्निसा मिर्जा गियास बेग की बेटी थीं। गियास बेग अकबर के दरबार में काम किया करते थे। उनके काम से खुश होकर अकबर ने उन्हें ऐतिमातुद्दौला की उपाधि दी थी। लेकिन एक मामूली दरबारी की बेटी से अकबर अपने बेटे की शादी कराने को तैयार नहीं थे। जहांगीर ने अकबर से कई बार कहा कि वो मेहरून्निसा के बिना नहीं रह पाएगा लेकिन अकबर अपना मन बना चुके थे।

अकबर के मना करने के कुछ दिनों बाद गियास बेग ने अपने भतीजे अलीगुल से नूरजहां की शादी कर दी। जहांगीर को जब नूरजहां की शादी के बारे में पता चला तो वह टूट गए। वो अब भी उसे भूल नहीं पा रहे थे। इसी तरह दिन गुजरते गए। कुछ दिनों बाद अकबर का निधन हो गया। अब सल्तनत पर जहांगीर का शासन था। उन्होंने सत्ता संभालते ही सबसे पहले मेहरून्निसा से शादी करने की तैयारियां तेज़ कर दी।

जहांगीर लगातार मेहरून्निसा को उससे शादी करने के लिए मजबूर करता रहा। लेकिन मेहरून्निसा अपने पति से बेहद प्यार करती थी इसलिए वो नहीं झुकी। जहांगीर एक के बाद लगातार मेहरून्निसा को चिट्ठियां लिखा करता, लेकिन इसका कोई भी असर मेहरून्निसा पर नहीं पड़ा। बल्कि मेहरून्निसा ने उन चिट्ठियों का जवाब देते हुए जहांगीर से ये तक कह दिया, कि उनके जैसे शासक को एक औरत से उसके पति को छोड़ने और जबर्दस्ती शादी करने की बात शोभा नहीं देती।

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इन सब बातों के बाद भी जहांगीर नहीं माना। उसने अब मेहरून्निसा के पति को जान से मार देने का मन बना लिया। मेहरून्निसा और अलीगुल बंगाल में रहा करते थे। जहांगीर ने पहले अलीगुल को रास्ते से हटाने के लिए उसे एक शेर से लड़वाया।अलीगुल सेना में था, उसे जंग की कई तरकीबों के बारे में पता था। अलीगुल ने निहत्थे ही शेर को हरा दिया। इसके बाद जब जहांगीर को कोई भी रास्ता नहीं सूझा तो उसने धोखे से अलीगुल को मरवा दिया।

जहांगीर को लग रहा था कि अब आसानी से मेहरून्निसा उससे शादी कर लेगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मेहरून्निसा ने ये मान लिया था कि अलीगुल को मरवाने में जहांगीर का हाथ है। इसलिए वह किसी भी तरह पिघलने को तैयार नहीं थीं। वहीं दूसरी तरफ अब जहांगीर हार मानते दिख रहे थे। उन्होंने शासन से लेकर सभी जरूरी कामों को नज़रअंदाज करना शुरू कर दिया। आलम ये था कि राजा का दरबार भी लगना अब बंद हो गया था। प्रजा अपनी परेशानियां लेकर किसके पास जाए ये सबसे बड़ा सवाल था। ताकतवरों का कमजोरों पर जुल्म बढ़ रहा था। लेकिन जहांगीर को फिलहाल इन बातों का मानों कोई ख्याल ही न था।

प्रजा से लेकर सभी दरबारी जहांगीर की हालत देखकर परेशान थे। अब उनके पास एक ही रास्ता था। दरबार के बड़े लोग इकट्ठा होकर मेहरून्निसा के पास पहुंचे और उन्हें सारी बातें बताईं। मेहरून्निसा को नहीं पता था कि उनके शादी करने से इनकार के बाद शासन ठप हो गया है। पहले वो सब कुछ सुनती रहीं आखिर में बोलीं कि वो शादी करने को तैयार हैं।

पूरे राज्य में खुशी की लहर दौड़ गई। दोनों की धूमधाम से शादी हुई। शादी के बाद ही मेहरून्निसा को नूरजहां का नाम दिया गया। नूरजहां इस सब के बाद जहांगीर के साथ ही पूरे शासन की व्यवस्था का भी ध्यान रखने लगी थीं। जितनी देर तक दरबार लगता नूरजहां वहां बैठी रहतीं। यहां तक की कुछ इतिहासकार ये भी कहते हैं कि नूरजहां से शादी के बाद जहांगीर ने शासन के कामों में ध्यान देना बंद कर दिया था इसलिए नूरजहां ने सभी कामों की कमान अपने हाथों में संभाल ली थी।

बादशाह जहांगीर ने पंजाब के शहर जलंधर से 40 किलोमीटर की दूरी पर नूरजहां के जन्मस्थल पर नूरमहल बनवाया था। कहते हैं कि इसी रास्ते से जब मेहरून्निसा की मां और पिता गुजर रहे थे तो रास्ते में ही प्रसव पीड़ा हुई और मेहरून्निसा का जन्म हुआ था। अब इसी जगह पर जहांगीर और नूरजहां के प्यार की निशानी मौजूद है।

(सभी तथ्य मशहूर डच लेखक डी-लायट की किताब ‘डिस्क्रिप्शन ऑफ इंडिया एंड फ्रैग्मेंट ऑफ इंडियन हिस्ट्री’ से लिए गए हैं।)

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