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मोहम्मद अली जिन्ना: हिंदू परिवार में पैदा हुआ लड़का कैसे बन गया पाकिस्तान का ‘कायदे-आजम’?

मोहम्मद अली जिन्ना को लेकर पूरे देश में विवाद जारी है। कहीं उनकी तस्वीर को हटाने को लेकर, तो कहीं हॉस्टल के नाम को बदलने को लेकर प्रदर्शन और हंगामा दोनों चल रहा है। एक धड़े का कहना है कि मोहम्मद अली जिन्ना मुस्लमान थे और उन्होंने पाकिस्तान बनवाया था, इसलिए उनकी तस्वीरों को भारत में नहीं लगाना चाहिए। वहीं इस बात का विरोध कर रहे दूसरे समूह का कहना है कि हिन्दुस्तान को आज़ादी दिलाने के लिए जिन्ना का अहम रोल था, इसलिए उन्हें भी सम्मान दिया जाना चाहिए। पाकिस्तान के कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना को लेकर चल रहे हंगामे के बीच ये जानना बेहद जरूरी है कि आखिर जिन्ना की असली पहचान क्या थी? दरअसल जिस जिन्ना के नाम पर आज हिन्दू- मुसलमान की राजनीति हो रही है, एक समय में उनका परिवार हिन्दू था।

पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना का जन्म एक हिन्दू परिवार में हुआ था। लेकिन एक विवाद के कारण उन्हें अपना धर्म बदलना पड़ा। जिन्ना हिन्दू से मुसलमान हुए और बाद में उन्होंने उसी धर्म के आधार पर एक देश बनाने की मांग तक रख डाली। जिन्ना का परिवार गुजरात के काठियावाड़ का रहने वाला था। हैरानी की बात ये है कि महात्मा गांधी भी इसी जगह से थे।

मोहम्मद अली जिन्ना के दादा का नाम प्रेमजी भाई मेघजी था। उन्होंने मछली के कारोबार से काफी पैसे कमाए थे। लेकिन उनका समाज उनके इस काम से खुश नहीं था। दरअसल मेघजी का संबंध लोहना जाति से था। लोहना जाति के लोग मांस मछली नहीं खाते थे। समाज का कोई व्यक्ति अगर ऐसा करता था तो उसका बहिष्कार कर दिया जाता था। प्रेमजी भाई मेघजी ने उसी समाज से होते हुए भी मछली का कारोबार किया था। व्यापार इतना बढ़ा कि उन्होंने विदेशों में भी अपने दफ्तर खोल दिए थे।

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प्रेमजी भाई मेघजी का व्यापार जितने तेजी से बढ़ रहा था, उतने ही तेजी उनके खिलाफ लोगों का विरोध भी बढ़ता जा रहा था। मेघजी पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था कि वो ये कारोबार छोड़ दें, लेकिन मेघजी का परिवार अब इसी कारोबार के भरोसे था। ऐसे में मेघजी न तो अपने कारोबार को बंद करना चाहते थे और न ही अपना समाज छोड़ना चाहते थे। वो लगातार समाज और कारोबार में ताल-मेल बैठाने की कोशिश करते रहे , फिर भी बात नहीं बनी। समाज का लगातार विरोध झेलते हुए भी प्रेमजी भाई मेघजी हिन्दू बने रहे, जबकि समाज ने अब उनका बहिष्कार कर दिया था।

मेघजी के परिवार की अब दूसरी पीढ़ी भी बड़ी हो गई थी। व्यापार संभालने का जिम्मा अब पुंजालाल ठक्कर पर आ गया था। पुंजालाल जिन्ना के पिता थे। पुंजालाल को अपने पिता और परिवार का बहिष्कार लंबे समय से खटक रहा था। वो हर बार इस बहिष्कार का विरोध करते लेकिन परिवार में कोई खास गौर नहीं करता। ऐसे में उन्होंने अपनी पत्नी और चार बच्चों के साथ मिलकर मुसलमान बनने का फैसला कर लिया। हालांकि मेघजी के दूसरे बच्चों ने ऐसा नहीं किया वो हिन्दू ही बने रहे।

पुंजालाल के इस फैसले का विरोध उनके परिवार में भी शुरू हो गया। किसी को ये बात रास नहीं आई कि बहिष्कार के विरोध में पुंजालाल ने हिन्दू धर्म कैसे छोड़ दिया। परिवार के विरोध के बीच पुंजालाल ने गुजरात छोड़ने का फैसला कर लिया। गुजरात छोड़ कर पुंजालाल अपने पूरे परिवार के साथ कराची आ गए। कराची में उनका व्यापार और तेज़ी से बढ़ने लगा। व्यापार इतना ज्यादा बढ़ गया था कि अब उन्होंने एक दफ्तर लंदन में भी खोल दिया।

अब जिन्ना के परिवार के सभी लोग मुसलमान हो गए थे। हालांकि उनके कई रिश्तेदार अब भी हिन्दू हैं और गुजरात में रहते हैं। जिन्ना पहले वो खुद को मुसलमान कहलवाने से परहेज किया करते थे। लेकिन बाद में सियासत इस तरह से बदली कि जिन्ना ने मुस्लिम लीग की स्थापना कर डाली। मोहम्मद अली जिन्ना ने करोड़ों मुसलमानों को भरोसा दिलाया कि पाकिस्तान उनके लिए एक महफूज़ जगह होगी, जहां उनका विकास होगा। इसके बाद जिन्ना ने पाकिस्तान का निर्माण कर दिया।

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हालांकि मोहम्मद अली जिन्ना पर लिखी कई किताबों में ये भी मिलता है कि जिन्ना पाकिस्तान के निर्माण को अपनी भूल मानते थे। पाकिस्तान के लोग उन्हें सच्चा मुसलमान नहीं मानते थे। इसके पीछे कई कारण बताए गए जैसे की, जिन्ना खुद को उन सभी कामों से दूर रखते थे जो आम मुसलमान किया करते थे, जैसे नमाज़ पढ़ना।

Jinnah, Pakistan and Islamic Identity किताब में एक घटना का जिक्र किया गया है जब जिन्ना पाकिस्तान में अपने मुसलमान भाईयों से बात करने जाते हैं। किताब के मुताबिक एक मस्जिद में जिन्ना सभी मुसलमानों को संबोधित करने के लिए नमाज के बाद माइक संभालते हैं कि तभी लोग उन्हें धक्का देकर नीचे उतार देते हैं। कई किताबों में इस बात का भी जिक्र है कि जिन्ना पाकिस्तान के निर्माण को अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल मानते थे।

पाकिस्तान के कायदे आजम जिन्ना एक का जीवन धर्म और राजनीति के बीच में उलझ कर रह गया। जिन्ना भारत के लोगों के लिए तो पाकिस्तान के कायदे आजम थे। लेकिन पाकिस्तान में एक बहुत बड़ा तबका ऐसा भी है जो जिन्ना को कायदे आजम मानने तक से इनकार करता है। इसका अहसास मोहम्मद अली जिन्ना को उस दिन खुद मस्जिद में हो गया था।

मोहम्मद अली जिन्ना एक ऐसा नाम बन कर रहे गए जो न पाकिस्तानी बन सके और न ही भारतीय। जिन्ना को न ही मुसलमानों ने अपना माना और न ही हिन्दुओं ने। ऐसे में जिन्ना के नाम और तस्वीर को लेकर भारत में विरोध और हंगामा कायदे आजम की जिंदगी की तरह ही है…

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