जवाहर लाल नेहरू, कमला नेहरू, कराची, पाकिस्तान, पाकिस्तान के कराची में ऐसा क्या है जो लोग आज भी जवाहरलाल नेहरू को याद करते हैं

पाकिस्तान के कराची में ऐसा क्या है जो किसी भी भारतीय को हैरान कर देगा?

भारत में हम अकसर देखते हैं कि सड़कों के नाम नेहरू, गांधी, पटेल जैसे नेताओं के नाम पर रखे जाते हैं। लगभग हर देश में ऐसा ही होता कि वहां कि सड़कें अपने नेताओं के नाम पर होती हैं। ऐसे में अगर पड़ौसी मुल्क पाकिस्तान की बात करें तो यहां एक चीज आपको हैरान कर सकती है। दरअसल पाकिस्तान में कई सड़कें भारतीय महिला नेताओं के नाम पर हैं। दरअसल पाकिस्तान जो पहले हिन्दुस्तान का ही हिस्सा था, वहां पर नेहरू परिवार काफी लोकप्रिय था। वैसे तो नेहरू की लोकप्रियता पाकिस्तान के हर हिस्से में थी लेकिन कराची में नेहरू की लोकप्रियता दूसरे जगहों के मुकाबले कहीं ज्यादा थी। आजादी से पहले कराची में एक सड़क हुआ करती थी। इस सड़क को मोती लाल नेहरू रोड कहा जाता है।

वक्त बदला और कराची के लिए नेहरू परिवार का चेहरा भी बदल गया। कराची में अब युवा नेता जवाहर लाल नेहरू हर किसी के हीरो थे। इसका नतीजा ये रहा कि सड़क का नाम भी बदलकर जवाहर लाल नेहरू रोड कर दिया गया। हालांकि बंटवारे की लकीर ने जहां एक तरफ लोगों की तकदीर बदल दी वहीं सड़कों के नाम भी बदल दिए गए। जवाहर लाल नेहरू रोड को अब जिगर मुरादाबादी रोड पुकारा जाता है। लेकिन कराची शहर की एक सड़क आज भी नेहरू परिवार के नाम से जुड़ी हुई है।

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कराची का सबसे महंगा मोहल्ला कॉस्मोपॉलिटन सोसाइटी है। यहां पर एक सड़क है जिसका नाम कमला नेहरू रोड है। जब आप इस रोड की लोकेशन के बारे में जानेंगे तो आपको हैरानी होगी। दरअसल कराची में सबसे महंगी जगह कॉस्मोपॉलिटन सोसाइटी है। इसी सोसाइटी के पास जिन्ना रोड है जिसके ठीक सामने वाला कमला नेहरू रोड है। कमला नेहरू ने भी स्वतंत्रता की लड़ाई में खूब योगदान दिया। जहां एक तरफ पुरुषों में स्वतंत्रता सेनानियों के लिए उदाहरणों की भीड़ थी, तो वहीं कमला नेहरू उन कुछ महिलाओं में से एक थीं जो आजादी के लिए मेहनत कर रही थीं।

हालांकि कमला नेहरू अकेली ऐसी भारतीय महिला नहीं हैं जिनके नाम से कराची में सड़के हैं। कमला नेहरू रोड से ही कुछ दूरी पर सरोजनी नायडू रोड भी मौजूद है। इसे नायडू रोड भी कहा जाता है। इसी तरह एक दूसरी कॉलोनी में एनी बेसेंट रोड भी मौजूद है।

मशहूर शख्सियतों के नाम पर सड़क के नाम रखना पाकिस्तान की एक पुरानी प्रथा है। जिन्ना हो या फिर सर सैयद यहां पर आपको हर दूसरी सड़क का नाम ऐसा ही दिखाई देगा। हालांकि यहां कुछ ही सड़कों के नाम बेनजीर भुट्टो और फातिमा जिन्ना के नाम पर हैं। ऐसे में भारतीय महिलाओं के नाम पाकिस्तान की सड़कों पर होना भारत के लिए गर्व की बात है।

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भारत की इन तीनों महिलाओं में से सबसे ज्यादा पाकिस्तान में कमला नेहरू को याद किया जाता है। जिस वक्त 1921 में असहयोग आंदोलन चल रहा था तो देश के बड़े बड़े नेता सलाखों के पीछे पहुंच गए थे। इनमें जवाहर लाल नेहरू का नाम भी शामिल है। ऐसे में सामने आईं कमला नेहरू जिन्होंने न खुद इस आंदोलन से जुड़ने का बीड़ा उठाया बल्कि दूसरी महिलाओं के लिए भी एक प्रेरणा बनीं। इसी तरह महिलाओं का काफिला भी बढ़ा और एनी बेसेंट और सरोजनी नायडू जैसी महिलाएं भी समाज के लिए नज़ीर बन गईं।

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