महाभियोग, राज्यसभा अध्यक्ष, लोकसभा अध्यक्ष, दीपक मिश्रा, चीफ जस्टिस

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ क्या है विपक्ष का महाभियोग प्रस्ताव?

भारतीय इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब चार जजों ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा से नाराजगी दिखाई। कई दिनों तक ये बात विवादों में रही। अब विपक्षी दल इन आरोपों के आधार पर ही चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही है। न्यूज़ में भी यही मुद्दा छाया हुआ है लेकिन आखिर महाभियोग होता क्या है ये बात जाननी बेहद जरूरी है। इसलिए हम आपको बताएंगे कि महाभियोग क्या होता है और इसे लाने की क्या प्रक्रिया होती है।

क्या होता है महाभियोग

भारतीय संविधान में प्रस्ताव है कि दोनों ही सदनों मेंअगर दो तिहाई बहुमत से चीफ जस्टिस को हटाने का प्रस्ताव पास होता है, तो फिर राष्ट्रपति उसे अपनी मंजूरी दे देता है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही चीफ जस्टिस को पद से हटना पड़ता है। इसी प्रक्रिया को संविधान में महाभियोग कहा जाता है।

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प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया

मान लें किसी चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव लाना है तो लोकसभा में कम से कम 100 सांसद और राज्यसभा के कम से कम 50 सांसद प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करते हैं। बाद में प्रस्ताव को दोनों सदनों में से किसी एक में पेश किया जाएगा। हालांकि प्रस्ताव को पेश करने के लिए राज्यसभा अध्यक्ष और लोकसभा अध्यक्ष को देनी होती है। दोनों सदनों के अध्यक्ष के पास ये अधिकार है कि वो चाहे तो प्रस्ताव को ठुकरा दें। अगर ठुकरा देते हैं तो प्रक्रिया फिर से शुरू होगी अगर प्रस्ताव मंजूरी होता है तो आगे की प्रक्रिया शुरू होती है।

बनेगी जांच कमेटी

पूरे मामले की जांच के लिए एक जांच कमेटी बनाई जाती है। इस कमेटी में तीन लोग होते हैं। पहला व्यक्ति सुप्रीम कोर्ट का जज होना चाहिए, दूसरा हाईकोर्ट का जज और तीसरा कानून का जानकार। पूरी जांच के बाद कमेटी सदन में अपनी रिपोर्ट पेश करती है। कमेटी की रिपोर्ट में अगर जस्टिस को दोषी मान लिया जाता है तो फिर जिस सदन में प्रस्ताव रखा गया होता है कमेटी अपनी जांच रिपोर्ट उस सदन में रखती है। सदन उस प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे देती है तो फिर इसे दूसरे सदन में भेज दिया जाता है। दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत मिलने के बाद राष्ट्रपति के पास भेज दिया जाता है।

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बन जाएगी मिसाल

हमारे संविधान में महाभियोग की प्रक्रिया तो है लेकिन आज तक किसी भी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग नहीं चलाया गया। हालांकि ऐसी ही प्रक्रिया हाईकोर्ट के जज के लिए भी होती है। इससे पहले हाईकोर्ट के कई जजों पर ये प्रक्रिया लगाई जा चुकी है।

क्या विपक्ष का प्रस्ताव मजाक भर है?

जैसा कि हमने बताया कि महाभियोग प्रस्ताव को पेश करने के लिए राज्यसभा अध्यक्ष और लोकसभा अध्यक्ष को मंजूरी देनी होती है। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और राज्यसभा अध्यक्ष वेंकैया नायडु दोनों ही इस प्रस्ताव की मंजूरी देंगे ये दूर की कौड़ी लगती है। इसके अलावा अगर प्रस्ताव को मंजूरी भी मिल जाए, तो विपक्ष के पास न तो लोकसभा में और न ही राज्यसभा में बहुमत है। ऐसे में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ विपक्ष का महाभियोग प्रस्ताव महज एक मजाक भर है…

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