ओसामा बिन लादेन

ओसामा बिन लादेन ने जब अपनी बीवियों से कहा- तुम सबको मरना होगा…

9/11 के बाद पूरी दुनिया सदमे में थी। दुनिया के हर कोने में सुरक्षा बढ़ाई जा रही थी। वहीं दुनिया का एक ऐसा हिस्सा भी था जहां पर ओसामा बिन लादेन का परिवार भागने की तैयारी में लगा हुआ था। 10 सितंबर 2001 को ओसामा ने अपनी पत्नियों से कहा कि वह कंधार छोड़ने की तैयारी कर लें। परिवार के सभी लोगों को खास तौर पर कहा गया था कि ज्यादा सामान न बांधे। एक व्यक्ति के लिए एक ही बैग तैयार किया जाए।

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ओसामा ने ये भी नहीं बताया था कि उसके परिवार को जाना कहा है। कुछ पता था तो ये, कि शाम को जो बस सड़क के सामने से गुजरती है उसमें बैठ जाना है और जहां तक वह बस जाए वहां तक उन लोगों को जाना होगा। ओसामा के कहे के मुताबिक बस उस शाम अपने तय समय से सड़क पर पहुंची। ओसामा की चारों पत्नियां इस बस पर अपने बच्चों के साथ सवार हो चुकी थीं।

ओसामा के बच्चों की ये तस्वीर एबटाबाद वाले घर में खींची गई थी

बस उबड़ खाबड़ रास्तों से होकर गुजर रही थी। परिवार के सभी लोगों को साफतौर पर कह दिया गया था कि किसी भी अंजान आदमी से बातचीत नहीं करनी। रास्ते में ज्यादातर मुसाफिर अमेरिका में हुए आतंकी हमले की बात कर रहे थे। लोगों की बातों से ओसामा के घरवालों को पता चला कि अमेरिका में कोई दो ऊंची इमारतें गिरा दी गई हैं।

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परिवार के लोग आपस में धीमी आवाज में बात कर रहे थे। सफर लंबा था और अजीब भी। क्योंकि पूरे परिवार के लिए रास्ते के साथ मंजिल भी अनजान थी। तीन दिन तक बस इसी तरह चलती रही। तीसरे दिन दोपहर में बस जलालाबाद के बाहर एक किले के पास रूकी।

ये अल कायदा का ट्रेनिंग सेंटर था। इस किले में ही आतंकवादियों को हमले करने की ट्रेनिंग दी जाती थी। यहां पर खाने पीने का सारा इंतजाम था। ओसामा ने अपने परिवार के लिए ये ठिकाना इसलिए चुना था क्योंकि यहां उन्हें कोई नहीं जानता था और न ही यहां कोई आता था।

9/11 के बाद ओसामा का परिवार जलालाबाद के इस किले में रूका था

अब तक परिवार के लोगों को नहीं पता था कि आखिर उन्हें यहां क्यों बुलाया गया है। घर की औरतों ने किले के एक कमरे में अपने रूकने का इंतजाम किया। बिस्तर लगाया, साफ सफाई की। एक कोने में रसोई का भी इंतजाम कर लिया। इसी तरह से दिन निकलने लगे। ओसामा ने अपने परिवार की सुरक्षा के लिए कुछ गार्ड रखे थे। लेकिन परिवार की औरतों को गार्ड्स से बात करने की कोई इजाज़त नहीं थी।

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किले में रहते हुए सभी के पास काफी खाली वक्त था। जब गार्ड्स किसी काम से बाहर जाते तो सभी औरतें किले की आंगन में इकट्ठा हो जाती। वह अपने नकाब उतार देती और एक दूसरे से बातें किया करती थीं। इस किले में रिश्तेदारों को भी आने की इजाज़त नहीं थी। घर की औरतें एक दूसरे की अच्छी सहेलियां थी। हालांकि ओसामा की पहली और दूसरी पत्नी में कम बनती थी। फिर भी वह सब साथ रहती थीं।

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धीरे-धीरे अफगानिस्तान में माहौल खराब होने लगा। अमेरिका ने कंधार और जलालाबाद के इलाकों में हवाई बमबारी करनी शुरू दी थी। औरतों को खास हिदायत दी गई थी कि अपनी चादरों के नीचे ग्रेनेड रखें खतरा महसूस होने पर खुद को उड़ा दें। ओसामा बिन लादेन ने अपनी बीवियों को कह रखा था कि किसी के हाथ आने के बजाए उन लोगों को खुदकुशी कर लेनी होगी। वहीं दूसरी तरफ ओसामा इन हवाई हमलों का मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी कर रहा था। ओसामा अपने बेटे उमर को भी ट्रेनिंग दे रहा था। ओसामा ने उमर के हाथों संगठन की कमान सौंपने का मन बना लिया था। लेकिन उमर अलग था। वह दुनिया में दहशत फैलाने के हक में नहीं था। वह नहीं चाहता था कि बेगुनाह मारे जाएं। ओसामा चाहता था कि उमर अमेरिका में हवाई हमले करे। उमर ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। उस दिन दोनों बाप बेटे में खूब लड़ाई हुई।

ओसामा बिन लादेन का बेटा उमर और उसकी पत्नी

उमर ने मन बना लिया कि अब घर छोड़कर चला जाएगा। उसने अपनी मां नजवा से साथ चलने को कहा। नजवा ओसामा की पहली पत्नी और बुआ की बेटी थी। नजवा ने उमर से कहा कि उसका बाप अच्छा आदमी है और वह अपने पिता को गलत समझ रहा है। लेकिन उमर ने अपना मन बना लिया था। वह पूरा परिवार छोड़कर चला गया। ये ओसामा बिन लादेन के परिवार में पड़ी पहली दरार थी।

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नजवा को भी जब ओसामा बिन लादेन की असलियत का पता चला तो उसने भी ओसामा को छोड़ दिया। नजवा अपने माता-पिता के पास सीरिया आ गई। वहां से उसने ओसामा के ऊपर एक किताब भी लिखी।

ओसामा की पहली पत्नी नजवा

इसके कुछ वक्त के बाद ओसामा पूरे परिवार के साथ जलालाबाद से भी निकल गया। कहते हैं कि वहां से जाने के बाद वह कई साल भटकता रहा। कभी पाकिस्तान गया तो कभी इरान। लेकिन कहीं चैन से नहीं बैठ पाया। इसी तरह भटकते भटकते सालों गुजर गए और आखिर में एबटाबाद में अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन को ढूंढ निकाला और हमेशा के लिए आतंक के इस चेहरे का अंत कर दिया।

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