रानी पद्मावती

रानी पद्मावती ने क्यों उतारा था अपना कंगन…. कैसे ये पहुंचा अलाउद्दीन खिलजी के पास?

रानी पद्मावती’ में अब तक आपने पढ़ा की तोते हिरामनी ने राजा रतन सिंह को उनकी पहली पत्नी के आदेश और रानी पद्मावती के बारे में बताया। राजा अपनी पहली पत्नी के आदेश से नाराज होकर चित्तोड़गढ़ छोड़ देते हैं। रतन सिंह एक स्वयंवर में रानी पद्मावती को हराकर उनसे शादी कर लेते हैं। वहीं एक पंछी से अपनी पहली पत्नी का संदेशा पाकर रतन सिंह वापस चित्तोड़ लौटते हैं। अब आगे…

राजा रतन सिंह के वापस चित्तोड़गढ़ लौटने के बाद पूरे राज्य में खुशी मनाई गई। राजा रतन सिंह एक ऐसी रानी के साथ वापस लौटे थे जिनकी खूबसूरती के बारे में लोगों ने बस सुना ही था। रानी पद्मावती की खूबसूरती के किस्से अब मशहूर होने लगे थे। राजा रतन सिंह अपनी दोनों रानियों के साथ खुशी-खुशी राज्य चला रहे थे। लेकिन राजा के मंत्रीमंडल में एक ऐसा भी सख्श था जो उनके खिलाफ साजिश रच रहा था। ये कोई और नहीं बल्कि राजा रतन सिंह का खास मंत्री राघव चेतन था। राघव चेतन चारों वेद और ज्योतिष का जानकार था। साथ ही राघव को जादू और तंत्र-मंत्र की भी विद्या आती थी। एक दिन राघव चेतन ने अमावस्या की रात में जादू की मदद से राजा को चांद दिखा दिया। राजा जानते थे कि ये महज एक जादू है लेकिन फिर भी चांद की खूबसूरती देखकर उन्होने राघव की तारीफ कर दी। राजा राघव के जादू से काफी प्रभावित हो चुके थे। धीमे-धीमे राघव राजा रतन सिंह का चहेता बन गया।

एक दिन दरबार के कुछ मंत्रियों ने राघव को काला जादू करते पकड़ लिया। मंत्रियों ने इसकी शिकायत राजा से की। मंत्रियों ने राजा से कहा कि जो आदमी अमावस्या की राज में चांद दिखा सकता है वो राज्य की खुशियों पर भी ग्रहण लगा सकता है। मंत्रियों ने राजा से राघव को मृत्युदंड देने की बात कही। राजा रतन सिंह ने मृत्युदंड की मांग को तो मना कर दिया लेकिन लोगों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए उन्होंने राघव चेतन को देश निकाला सुना दिया।

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देश निकाला का आदेश राघव चेतन के लिए अपमान था लेकिन वो कुछ कर भी नहीं सकता था। देश निकाला की बात पूरे राज्य में जंगल के आग की तरह फैल गई। हर कोई इस फैसले की खुशी मना रहा था लेकिन रानी पद्मावती इस फैसले से घबराई हुईं थी।रानी पद्मावती गृहों की दशा में खासा विश्वास रखती थीं। रानी को पता था कि उनकी शनि की दशा खराब चल रही है और इसे अगर कोई सही कर सकता था तो वो राघव चेतन था। रानी पद्मावती राघव चेतन के ज्ञान को जानती थीं और ये भी कि अगर राघव चेतन को अपमानित कर के भेजा गया तो वो पूरे राज्य से इसका बदला लेगा।

रानी पद्मावती किले की छत पर खड़ी होकर सोच ही रही थीं कि उन्होंने सामने से राघव चेतन को गुजरते हुए देखा। रानी से रहा नहीं गया। उन्होंने राघव चेतन को आवाज दी। रानी पद्मावती राघव चेतन को मनाने लगी। वो राघव से कहने लगी कि वो नहीं चाहती हैं कि राघव अपने अपमान का बदला पूरे राज्य से लें। रानी ने राघव से अपनी शनि की दशा और राज्य के सुख के लिए पूजा करने को कहा। रानी पद्मावती ने इसके लिए अपने हाथों से सोने का कंगन निकालते हुए राघव चेतन को दे दिया। राघव चेतन अपने अपमान को भूला नहीं पा रहा था। राघव ने रानी से कंगन लिया और चुपचाप वहां से चला गया।

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राघव कईं दिनों तक जंगल में भटकता रहा। एक दिन वो जंगल में जादू कर रहा था कि कुछ सिपाहियों ने उसे पकड़ लिया। सिपाही उसे लेकर दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी के पास ले आए। राघव ने सोचा कि रतन सिंह से अपने अपमान का बदला लेने का इससे अच्छा समय उसे नहीं मिलेगा। राघव ने अलाउद्दीन खिलजी से चित्तोड़ पर हमला करने को कहा। वो अल्लाउद्दीन को रानी पद्मावती की खूबसूरती के बारे में बताने लगा। राघव चेतन ने रानी पद्मावती का दिया कंगन अलाउद्दीन को दिया और उसे रानी पद्मावती के खूबसूरती की कहानी सुनाने लगा। राघव की बातें सुनकर अलाउद्दीन हैरान हो गया। अलाउद्दीन ने फैसला किया कि वो अब पद्मावती को अपनी रानी बना कर ही रहेगा। हालांकि रानी पद्मावती तक पहुंचना इतना आसान नहीं था। ये बात खिलजी भी जानता था। अल्लाउद्दीन ने राघव से जानकारी लेने के बाद चितौड़ पर हमला कर दिया। खिलजी की सेना राज्य के अंदर तो आ गई थी लेकिन किले पर चढ़ाई करना आसान नहीं था। पहाड़ पर बसे चितौड़गढ़ किले में एक हज़ार से ज्यादा लोग रहा करते थे।

खिलजी की सेना ने किले को चारो तरफ से घेर लिया। अल्लाउद्दीन इंतजार में था कि कब रतन सिंह की सेना हार मान जाए। लेकिन राजपूत सेना को हराना इतना भी आसान नहीं था जितना खिलजी ने सोचा था। कई दिन गुजर गए। किले के अंदर संसाधनों की कमी होती जा रही थी लेकिन राजपूत सेना हार मानने को तैयार नहीं थी। इसलिए अब खिलजी ने अपना पैतरा बदला। अलाउद्दीन खिलजी ने रतन सिंह के पास अपना एक संदेशवाहक भेजा। खिलजी के भेजे आदमी ने राजा रतन सिंह से कहा कि खिलजी बस एक बार रानी पद्मावती को देखना चाहते हैं। उसने ये भी कहा कि रानी को देखने के बाद अलाउद्दीन अपनी सेना के साथ वापस लौट जाएंगे। उस समय ये परंपरा थी कि राजपूत महिलाएं किसी पराए मर्द के सामने नहीं जातीं थी। ऐसे में राजा रतन सिंह ने इस बारे में सोचने के लिए समय मांगा।

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अलाउद्दीन की शर्त राजा रतन सिंह को नामंजूर थी लेकिन राज्य और लोगों के खातिर राजा ने मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई। बैठक में खिलजी की तरफ से रखी गई बात पर चर्चा शुरू हुई। सभी जानते थे कि राजपूत सेना के पास संसाधन कम होते जा रहे हैं। किले के बाहर जाना संभव नहीं है। इसलिए जल्द ही इस पूरी समस्या का हल निकालना होगा। बैठक में बहुत देर तक चर्चा होती रही। अंत में फैसला लिया गया कि रानी पद्मावती जल महल की सीढियों पर खड़ी रहेंगी और पानी पर पड़ रही परछाई को खिलजी देखेगा। इससे रानी पद्मावती खिलजी के सामने भी नहीं आएंगी और खिलजी की जिद भी पूरी हो जाएगी।

ऐसा ही किया गया। खिलजी को बुलाया गया। रानी जल महल की सीढ़ियों पर आकर खड़ी हो गईं। रानी पद्मावती की परछाईं पानी में पड़ी और पानी की परछाई सामने रखे शीशे में। अलाउद्दीन ने जब रानी की परछाई को शीशे में देखा तो वो पागल हो गया। अलाउद्दीन को राघव की कहानी फीकी लगने लगी थी। रानी पद्मावती जैसी खूबसूरत महिला खिलजी ने आज तक नहीं देखी थी। खिलजी ने सोच लिया था कि चाहे खून की ही होली क्यों न खेलनी पड़े वो रानी पद्मावती को पाकर ही रहेगा।

रतन सिंह ने अपना वादा निभा दिया था अब बारी अलाउद्दीन की थी। अलाउद्दीन ने राजा रत्न सिंह के पास संदेशा भेजवाया कि उसकी सेना वापस दिल्ली जा रही है। उसने राजा रत्न सिंह से जाने से पहले मिलने की इच्छा जाहिर की। अल्लाउद्दीन ने मिलने के लिए रतन सिंह को किले के बाहर बुलाया। राजा रत्न सिंह सुल्तान की चालाकी को नहीं समझ पाए। वह किले के बाहर सुल्तान खिलजी से मिलने के लिए चल पड़े। किले में कुल सात दरवाज़े थे। राजा एक-एक कर सभी दरवाजों से गुजरते हुए आगे बढ़ रहे थे। उन्हें इस बात की खुशी भी थी कि अब उनकी रानी और प्रजा किसी को भी दिल्ली के सुल्तान से खतरा नहीं है। सब वापस हंसी खुशी अपना जीवन जी सकेंगे। लेकिन जैेसे ही राजा रत्न सिंह सातवें दरवाज़े पर पहुंचे तो उनका ये भ्रम टूट गया। अलाउद्दीन ने एक चाल चली थी ताकि राजा रत्न सिंह दरवाज़े तक आ जाए। राजा के वहां पहुंचते ही अलाउद्दीन ने उन्हें बंदी बना लिया। आगे ‘रानी पद्मावती’ के दूसरे अंक में…………………..

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