रानी पद्मावती

रानी पद्मावती से क्यों नफरत करती थीं राजा रतन सिंह की पहली पत्नी नागमती?

फिल्म पद्मावती का एक गाना इन दिनों काफी मशहूर हो रहा है। गाने का नाम है घूमर। गाने में दीपिका पादुकोण बेहद सुंदर नज़र आ रही हैं। लेकिन इस गाने में दीपिका के अलावा भी दो कलाकार नज़र आ रहे हैं। पहले हैं शाहीद कपूर जो फिल्म में राजा रतन सिंह की भूमिका में हैं तो दूसरी हैं अनुप्रिया गोइयंका। अनुप्रिया इस फिल्म में राजा रतन सिंह की पहली पत्नी नागमती की भूमिका निभा रही हैं। आपने पद्मावती के बारे में तो बहुत कहानियां सुनी होंगी। लेकिन क्या चितौड़ की इस रानी के बारे में जानते हैं आप…

नागमती राजा रतन सिंह की पहली पत्नी थीं। कहते हैं कि राजा रतन सिंह से पहले नागमती ने तोते के मुंह से पद्मावती की सुदंरता का जिक्र सुना था। जब राजा रतन सिंह ने एक व्यापारी से हिरामनी नाम का एक तोता खरीदा तो वह लंबे समय तक राज्य में आकर्षण का केंद्र बना रहा। वो तोता लोगों से इंसानों की तरह बातें करता था। चितौड़ राज्य के बारे में ये बात काफी मशहूर हो गई थी कि यहां एक ऐसा तोता है जो इंसानों की तरह बोलता है।

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एक दिन रानी नागमती अपनी दासियों के पास बैठी हुई थीं। दासियां सेवा कर रही थीं और नागमती आराम कर रही थीं। नागमती के सामने तोता हिरामनी आ कर बैठ गया। नागमती ने सोचा कि क्यों ना तोते से कुछ बातें की जाएं। नागमती ने तोते से कहा कि सभी लोग कहते हैं कि वो दुनिया की सबसे सुंदर रानी हैं। लेकिन तोते ये बात मानने से इनकार कर दिया।

तोते की बात सुनते ही नागमती उठकर बैठ गईं। तोते की इस हरकत से रानी नागमती हिरामनी के पास गईं और पूछा कि क्या वो दुनिया की सबसे खूबसूरत रानी नहीं है? क्या सब लोग उनसे झूठ कहते हैं? इस बात पर तोते ने कहा कि वह बहुत सुंदर हैं लेकिन दुनिया की सबसे सुंदर राजकुमारी सिंहल के राजा की बेटी पद्मावती हैं। तोता हिरामनी नागमती को पद्मावती के किस्से बताने लगा। हिरामनी पद्मावती की सुदंरता की तारीफ करता गया। हिरामनी ने ये भी कहा कि वह हमेशा से पद्मावती के पास ही रहता था।

हिरामनी की बात रानी नागमती से ये बात बर्दाश्त नहीं हुई। नागमती ने सोचा कि अगर हिरामनी ये बातें राजा रतन सिंह के सामने कह दी तो राजा पद्मावती से शादी कर लेंगे। नागमती ने सोचा कि क्यों ना इस तोते को ही मार दिया जाए। उस वक्त राजा रतन सिंह अपने साथियों के साथ शिकार खेलने गए थे। मौका पाकर नागमती ने अपने एक सेवक को बुलाया और आदेश दिया कि वह हिरामनी को मार दे। रानी के आदेश के बाद सेवक हिरामनी को वहां से लेकर चला गया। सेवक ये जानता था कि हिरामनी में राजा रतन सिंह की जान बसती है। वह जानता था कि जब राजा वापस आएंगे और हिरामनी उन्हें नहीं मिलेगा तो वह बहुत परेशान हो जाएंगे। लेकिन सेवक ये भी जानता था कि रानी के आदेश को टाला नहीं जा सकता। सेवक को एक ख्याल आया कि क्यों न हिरामनी को छिपा दिया जाए? सेवक ने हिरामनी को छिपा दिया और वापस महल आ गया।

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राजा रतन सिंह जब शिकार से लौटे तो उन्होंने हिरामनी को सामने लाने का आदेश दिया। लेकिन राजा के सेवकों को हिरामनी कहीं न मिला। घंटों की तलाश के बाद भी जब हिरामनी के बारे में कुछ पता नहीं चला तो राजा बहुत व्याकुल हो गए। वहीं दूसरी तरफ रानी नागमती ये सब देखकर बहुत खुश हो रही थीं। जब राजा की तबीयत खराब होने लगी तो रानी के सेवक ने हिरामनी को राजा के सामने पेश किया। हिरामनी ने अपने साथ हुई सारी घटना के बारे में राजा को बता दिया।

राजा रतन सिंह को ये सब जानकर बहुत बुरा लगा। वह घर छोड़कर पद्मावती से शादी करने के लिए चले गए। राजा रतन सिंह ने रानी पद्मावती के स्वयंवर में हिस्सा लिया और स्वयंवर जीत कर रानी पद्मावती से शादी की। क्योंकि राजा रतन सिंह अपना राज्य छोड़कर आ गए थे। इसलिए वह अब सिंहल में ही रहने लगे। एक दिन राजा रतन सिंह शिकार खेल रहे थे कि उन्हें पेड़ पर एक पंछी बैठा दिखाई दिया। अचानक से पंछी राजा रतन सिंह के पास आया और चितौड़ के बारे में सब बताने लगा।

पंछी बताने लगा कि महाराज के जाने के बाद से प्रजा बहुत परेशान है। रानी किला छोड़कर जंगल में चली गई हैं। वह किसी दासी की तरह जीवन गुजार रही हैं। वह किसी से बात नहीं करतीं, बस जंगल के जानवरों से बात किया करती हैं। पंछी ने राजा रतन सिंह को बताया कि रानी नागमती ने ही उसे यहां भेजा है। राजा रतन सिंह ने जब ये बाते सुनीं तो उन्होने वापस चित्तोड़ लौटने का फैसला किया। राजा रतन सिंह के चितौड़ वापस आने की ख़बर सुनते ही प्रजा खुश हो गई। रानी नागमती राजा रतन सिंह के स्वागत में खूब श्रृंगार करती हैं। लेकिन राजा रतन सिंह जब आते हैं तो अकेले नहीं बल्कि पद्मावती को रानी बनाकर अपने साथ लाते हैं।

ये सब देखकर नागमती को बहुत बुरा लगता है। तब नागमती रानी पद्मावती से नफरत करने लगती हैं। जायसी की कविताओं में कई जगह दोनों रानियों के बीच झगड़ों का जिक्र मिलता है। जबकि राजा रतन सिंह दोनों ही रानियों को खुशी-खुशी रखने को तैयार थे। संजय लीला भंसाली का गाना घूमर कहीं न कहीं दोनों रानियों के बीच की लड़ाई को भी दिखाता है।

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