जब एक ‘तोते’ के कहने पर… रतन सिंह ने उठाई रानी पद्मावती पर ‘तलवार’

संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती अभी सिनेमा घरों में आई नहीं है लेकिन इस पर बवाल शुरू हो गया है। राजपूताना समाज का कहना है कि इस फिल्म में तथ्यों से छेड़छाड़ की गई है। वहीं देखा जाए तो रानी पद्मावती के बारे में कई कहानियां प्रचलित हैं। जो कहानियां रानी पद्मावती के बारे में प्रचलित हैं उनमें से एक है उनके स्वयंवर की कहानी।

रानी पद्मावती बचपन से ही बहुत सुंदर थीं। उनकी सुंदरता के चर्चे दूर-दूर तक थे। रानी पद्मावती का जन्म श्रीलंका के सिंहल राज्य में हुआ था। पद्मावती वहां के राजा गंधर्व सेन की बेटी थीं। बचपन से ही वह पूरे राज्य में काफी लोकप्रिय थीं।  दूसरे राज्य के लोग महज़ उनकी सुंदरता को देखने के लिए सिंहल आया करते थे। पद्मावती को बचपन से ही नाज और दुलार से पाला गया था। लेकिन पद्मावती अपना सबसे ज्यादा समय एक बोलते हुए तोते के साथ गुजारती थीं। उस तोते का नाम हिरामनी था। पद्मावती दिन-रात उस तोते से घंटों बातें किया करती थीं।

पद्मावती के बारे में ये बातें राज्य में फैलना शुरू हो गईं। लोगों का कहना था कि राजकुमारी घमंडी हैं और किसी से बात करना पसंद नहीं करतीं। वह बस तोते से ही बात करती हैं। राजा के कानों तक जब ये बात पहुंची तो उन्हें बिल्कुल अच्छा नहीं लगा। अपनी लाड़ली के बारे में इस तरह की बातें वह कभी बर्दाश्त नहीं कर सकते थे। राजा गंधर्व सेन ने सोच लिया कि अब इस तोते को पद्ममावती से अलग करना ही पड़ेगा। फिर क्या एक दिन मौका पाकर राजा ने हिरामनी को पद्मावती से अलग किया और उसे मारने का आदेश दे दिया। कहते हैं कि जानवर अपने ऊपर आने वाली आफत को भांप जाते हैं। शायद इसी कारण हिरामनी उड़ा और सिंहल राज्य से दूर चला गया।

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उड़ते-उड़ते जब हिरामनी जंगल में पहुंचा तो वहां पर कुछ शिकारियों की नज़र उस पर पड़ गईं। उन्होंने हिरामनी को अपने कब्जे में कर लिया। इस तरह से बोलने वाला तोता वह पहली बार देख रहे थे। चिड़िया पकड़ने वालों ने ऊंचे दाम पर तोते को एक व्यापारी को दे दिया। व्यापारी ने ये तोता और ऊंचे दामों में चितौड़ के राजा रत्न सिंह को बेच दिया।

हिरामनी जब भी बोलता तो किसी राजकुमारी की सुंदरता के बारे में बोलता। राजा के कानों में जब ये बात पड़ी तो वह बेहद प्रभावित हुए। राजा रतन सिंह ने कहा कि अगर ये तोता सच बोल रहा है तो वह उस रानी से शादी करना चाहेंगे। राजा के दरबार में मंत्री राघव को ये बात बिल्कुल पसंद नहीं आई। राघव का कहना था कि रतन सिंह अपनी प्रजा को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं। कहा जाता है कि राघव लंबे समय से राजा रतन सिंह का सिंहासन हथियाना चाहता था। इस तोते के जरिए उसे वह मौका मिल गया था।

कुछ ही दिनों के बाद राजा रतन सिंह को पता चला कि बहुत दूर सिंहल राज्य की राजकुमारी पद्मावती का स्वंयवर होने जा रहा है। साथ ही ये भी पता चला कि ये वही राजकुमारी थी जिसके बारे में तोता हिरामनी बात किया करता था। फिर क्या था राजा भी निकल पड़े स्वयंवर में हिस्सा लेने के लिए। वहां दूर-दूर से कई राजकुमार स्वयंवर में हिस्सा लेने आए थे। स्वयंवर की एक शर्त रखी गई थी। शर्त ये थी कि जो भी राजा राजकुमारी पद्मावती को तलवार बाज़ी में हराएगा वही उनसे शादी कर पाएगा। ये शर्त खुद रानी पद्मावती की तरफ से रखी गई थी। पिता गंधर्व सेन ने भी इस बात पर ऐतराज नहीं जताया। वह भी चाहते थे कि पद्मावती से उसी राजा की शादी हो जो उनकी रक्षा कर सके।

स्वयंवर शुरू हुआ। कई राजाओं को राजकुमारी पद्मावती ने धूल चटा दी। कोई भी उन्हें तलवारबाज़ी में हरा नहीं पा रहा था। एक के बाद एक राजा तलवार बाजी में हार रहे थे। कुछ ही देर में राजा रत्न सिंह का नाम आया।अब उन्हें अपना पराक्रम दिखाना। कहा जाता है कि तलवार बाज़ी का एक अद्भुत नज़ारा उस दिन देखने को मिला। तलवारों की टकराहट से महल गूंजने लगा। कुछ ही देर में राजा रतन सिंह ने रानी पद्मावती को तलवार बाज़ी में हरा दिया। रानी पद्मावती इस बात से बहुत प्रभावित हुईं और उन्होंने राजा रत्न सिंह से शादी करने का फैसला कर लिया।

कहते हैं दोनों की शादी धूमधाम से हुई। बड़ी संख्या में लोगों ने उस शादी में हिस्सा लिया। प्रजा को भी राजकुमारी की शादी में भागीदार बनाया गया। लेकिन उधर चितौड़ में राघव इस शादी से बिल्कुल खुश नहीं था। वह बस सत्ता को कैसे भी कर के हथियाना चाहता था। उसने शादी के फौरन बाद ही राजा रानी के लिए अपमानजनक बातें कहनी शुरू कर दीं। वह चाहता था कि इन बातों से खुश होकर प्रजा उसका साथ दे ताकि वह सत्ता पर कब्जा कर ले। राघव ने रानी पद्मावती को बाहरी बताकर उनके लिए गलत बातें भी कहीं। राजा रतन सिंह ये सब बर्दाश्त नहीं कर पाए और उन्होंने फौरन राघव को राज्य से चले जाने का हुकम दे दिया। ये राघव के लिए अपमान से कम नहीं था।

उधर राजा रानी का नया जीवन अानंदमय गुज़र रहा था। लेकिन राघव हर रोज राजा रत्न सिंह से बदला लेने की तरकीब ढूंढने में लगा था। कुछ ही दिनों में उसने अलाउद्दीन खिलजी के बारे में सुना। वह दिल्ली पहुंचा और अलाउद्दीन खिलजी के राज्य में शरण ले ली। कुछ ही दिनों में वह अलाउद्दीन खिलजी के भरोसेमंद लोगों में शुमार हो गया। इसी बात का फायदा उठाकर उसने राजा रत्न सिंह से बदला लेने का मन बना लिया।

राघव ने अलाउद्दीन खिलजी को रानी पद्मावती की सुंदरता के बारे में बताया। उसने कहा कि रानी पद्मावती दुनिया की सबसे खूबसूरत रानी है और ऐसी रानी सिर्फ दिल्ली में ही होनी चाहिए। अलाउद्दीन ने रानी पद्मावती को देखने का मन बना लिया। कहते हैं कि पानी में एक रानी पद्मावती की महज़ परछाई देकर ही वह उनका दीवाना हो गया था….

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