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क्रिकेट के मैदान पर अपने बल्ले से चौके-छक्कों की बरसात करने वाले मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने एक ऐसी मिसाल पेश की, जिसपर हर देशवासी को फक्र महसूस होगा।दरअसल 26 नवंबर 2008 को मुंबई हमले के दौरान आतंकियों से लोहा लेने वाले मरीन कमांडो प्रवीण तेवतिया को सचिन तेंदुलकर ने एक ऐसा गिफ्ट दिया, जो उनके लिए सबसे खास था। जिस बल्ले की चमक से सचिन विरोधी टीम के गेंदबाजों को चित करते थे, उसी बैट को उन्होंने प्रवीण को देकर उनके साहस को सलाम किया।

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मुंबई हमले की बरसी पर गेटवे ऑफ इंडिया पर आयोजित एक कार्यक्रम में सचिन तेंदुलकर और प्रवीण की मुलाकात हुई। इस दौरान प्रवीण ने मास्टर ब्लास्टर तेंदुलकर अपने अनुभव बताए। सचिन तेंदुलकर ने भी उस वक्त की घटना का जिक्र करते हुए प्रवीण को बताया कि मुंबई आतंकी हमले के दौरान वे इंग्लैंड के खिलाफ कटक में अपना मैच खेल रहे थे। मैच खत्म होने के बाद जब उन्होंने टीवी खोलकर देखा तो सभी न्यूज़ चैनल्स पर इसी घटना को लेकर ख़बरें चल रहीं थीं। सचिन ने ये भी बताया कि कैसे बाकि देशवासियों कि तरह वो भी इस हमले से काफी डर गए थे। सचिन तेंदुलकर ने प्रवीण की बहादुरी को सराहा और उन्हें अपना बल्ला भेंट देने का मन बना लिया।

आतंकियों से लिया था लोहा

बुलंदशहर के भटौना गांव के मरीन कमांडो प्रवीण तेवतिया की जितनी भी तारीफ की जाए वो कम होगी। उन्होंने मुंबई में उस वक्त मोर्चा संभाला था, जिस वक्त ताज होटल पर आतंकियों ने हमला कर तमाम बेगुनाहों को मौत के घाट उतार दिया था। तेवतिया ने अपने सीने पर गोलियां खाकर 3 आतंकियों को ढेर कर दिया था। आतंकियों को धूल चटाने वाले भारत के इस रणबांकुरे ने बहादुरी का परिचय देते हुए डंटकर मुकाबला किया। प्रवीण उन मरीन कमांडो की टीम में थे जो मुंबई के ताज होटल पर आतंकी हमले के दौरान सबसे पहले पहुंचे थे। उनके फेफड़े में गंभीर चोटें आई, लेकिन प्रवीण ने हार नहीं मानी। कई साल इलाज चलने के बावजूद प्रवीण ने अपने हौसले को कभी हारने नहीं दिया। भारत  के इस लाडले ने लद्दाख में मैराथन दौड़ में हिस्सा लिया और 72 किलोमीटर की रेस पूरी की। वर्तमान में प्रवीण एक अंतर्राष्ट्रीय रेसर के रूप में अपनी धाक जमा चुके हैं।

सचिन तेंदुलकर के साथ प्रवीण तेवतिया

मैराथन में भी प्रवीण का डंका

हमले के बाद प्रवीण की हालत ऐसी थी कि वे दोबारा बंदूक नहीं उठा सकते थे। जिस वजह से नेवी ने उन्हें नॉन-एक्टिव ड्यूटी दे दी थी। देश के लिए विपरीत हालातों में मोर्चा संभालने वाले इस जांबाज़ को डेस्क जॉब कभी नहीं भाया। यही वजह थी कि उन्होंने नेवी के लिए खुद को फिट साबित के मकसद से मैराथन में हिस्सा लेना शुरू कर दिया। उन्होंने 72 किलोमीटर लंबी खारदुंग ला मैराथन में हिस्सा लेते हुए मेडल जीतकर सबको चकित कर दिया। प्रवीण ने 2014 में मैराथन की ट्रेनिंग शुरू की थी। 2015 में उन्होंने मुंबई हाफ मैराथन में दूसरे नाम से हिस्सा लिया ताकि असफल होने पर उनकी नेवी की उम्मीद न टूटे। 2016 में उन्होंने इंडियन नेवी हाफ मैराथन में भी भाग लिया। प्रवीण ने 2017 में जयपुर में आयरन मैन हाफ ट्रेलथॉन में 1.9 किमी तैराकी, 90 किमी साइक्लिंग और 21 किमी दौड़ लगाकर एक नया मुकाम हासिल किया, जो आजकल के युवाओं के लिए सीख है।

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