Teachers' Day: हिंदू धर्म को लेकर क्यों अंग्रेजी से डरते थे डॉ. राधा कृष्णन के पिता, Teachers' Day,राधा कृष्णन,डॉ. राधा कृष्णन,Sarvepalli Radhakrishnan, सर्वपल्ली राधाकृष्णन

Teachers’ Day: हिंदू धर्म को लेकर क्यों अंग्रेजी से डरते थे डॉ. राधा कृष्णन के पिता?

डॉ. राधा कृष्णन भारत के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति रहे। इनको देश के दूसरे राष्ट्रपति के साथ ही एक महान शिक्षक के तौर पर भी जाना जाता है। इनके जन्मदिन पर ही भारत में पांच सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है।

डॉ. राधा कृष्णन का शुरुआती जीवन काफी कष्टमयी रहा। सर्वपल्ली राधकृष्णन का जन्म मद्रास के तिरुत्तिन में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके पिता काफी गरीब थे। उनके घर में इतने पैसे भी नहीं थे कि राधा कृष्णन को शिक्षा दी जा सके।

ये भी पढ़े- देश का वो राष्ट्रपति जिसने शादी के कार्ड पर लिखवायाः तोहफे लाना मना है!

ये पढ़कर आपको हैरानी हो सकती है लेकिन जिस शख्स के नाम पर देश में शिक्षक दिवस मनाया जाता है, उनके पिता ही नहीं चाहते थे कि सर्वपल्ली राधा कृष्णन पढ़ाई करें। उनके पिता चाहते थे कि राधा कृष्णन पुजारी बनें और धर्म-कर्म के कामों में दिल लगाएं। उन दिनों स्कूलों में अंग्रेजी पढ़ाने का चलन तेजी से बढ़ रहा था। राधा कृष्णन के पिता नहीं चाहते थे कि उनका बेटा अंग्रेजी में पढ़ाई करे, ये बात अलग है कि वे बाद में इसके लिए राजी हो गए।

Teachers' Day: हिंदू धर्म को लेकर क्यों अंग्रेजी से डरते थे डॉ. राधा कृष्णन के पिता, Teachers' Day,राधा कृष्णन,डॉ. राधा कृष्णन,Sarvepalli Radhakrishnan, सर्वपल्ली राधाकृष्णन

पैसों की किल्लत हमेशा से थी…लेकिन राधा कृष्णन की मेहनत और लगन को देखते हुए उन्हें एक के बाद एक स्कॉलरशिप मिलती चली गई।

उन दिनों स्कूल-कॉलेजों में बाइबल पढ़ाई जाती थी। बाइबल के अंशों को याद भी करवाया जाता था। इस दौरान एक ट्रेंड तेजी से फैल रहा था। वह था हिन्दु धर्म के खिलाफ दुष्प्रचार…कुछ विशेष संगठन के लोग समाज में धर्म परिवर्तन के साथ ही हिन्दु धर्म को लेकर कई भ्रांतियां पैदा करने का काम कर रहे थे।

Teachers' Day: हिंदू धर्म को लेकर क्यों अंग्रेजी से डरते थे डॉ. राधा कृष्णन के पिता, Teachers' Day,राधा कृष्णन,डॉ. राधा कृष्णन,Sarvepalli Radhakrishnan, सर्वपल्ली राधाकृष्णन

सर्वपल्ली राधाकृष्णन के पिता को शायद इस बात का ही डर था जिस कारण वह अपने बेटे को अंग्रेजी शिक्षा देना नहीं चाहते थे। लेकिन राधा कृष्णन ने इस ट्रेंड के विरुद्ध जाकर हिन्दु धर्म के बारे में बारीकी से पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने असल धर्म का मतलब उन लोगों तक पहुंचाया जो कुछ लोगों की बातों से प्रभावित होकर धर्म परिवर्तन कर रहे थे।

राधा कृष्णन सभी धर्मों का सम्मान करने वाले शख्स थे लेकिन उस दौरान कुछ विशेष समुदाय के लोग धर्म के नाम पर लोगों को भटकाने का काम कर रहे थे। इसलिए राधाकृष्णन ने धर्म से खुद को जोड़कर उसका असल मतलब जानने के बाद लोगों के बीच फैल रहे झूठ को गलत साबित कर दिया।

Teachers' Day: हिंदू धर्म को लेकर क्यों अंग्रेजी से डरते थे डॉ. राधा कृष्णन के पिता, Teachers' Day,राधा कृष्णन,डॉ. राधा कृष्णन,Sarvepalli Radhakrishnan, सर्वपल्ली राधाकृष्णन

एक शिक्षक के अच्छे गुण उनके अंदर उस दौरान ही आ गए थे। इसके बाद राधा कृष्णन जब शिक्षक बने तो कोई भी विषय पढ़ने से पहले खुद उसके बारे में अच्छे से जानकारी जुटाते और फिर छात्रों के बीच जाते। कई महत्वपूर्ण विश्वविद्यालयों में पढ़ाने के बाद साल 1962 में राष्ट्रपति पद पर काबिज हुए। बताते हैं कि राष्ट्रपति बनने के बाद कुछ छात्र और अध्यापक सर्वपल्ली राधा कृष्णन से मिलने पहुंचे। उन लोगों ने राधा कृष्णन के जन्मदिन पर शिक्षक दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा था। ये बात सुनकर राधा कृष्णन काफी खुश हुए…बोले, मुझे बहुत खुशी होगी अगर मेरा जन्मदिन शिक्षकों को समर्पित रहे…फिर क्या था…तब से लेकर आज तक 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जा रहा है… 17 अप्रैल 1975 को सर्वपल्ली राधा कृष्णन ने हमेशा के लिए दुनिया को अलविदा कह दिया…लेकिन उस दिन ही ये महान शिक्षक हमेशा के लिए अमर हो गया…


हमारे साथ जुड़ने के लिए या कोई खबर साझा करने के लिए यहां क्लिक करें। शिकायत या सुझाव के लिए हमें editorial@thedemocraticbuzzer.com पर लिखें। 24 घंटे के अंदर हम आपको संपर्क करेंगे।

Leave a Reply