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पाकिस्तान के इतिहास में कोई भी प्रधानमंत्री क्यों पूरा नहीं कर सका अपना कार्यकाल?

पाकिस्तान में होने वाले चुनाव में नवाज शरीफ इन दिनों एक बड़ा मुद्दा बन चुके हैं। भ्रष्टाचार के आरोप में पाकिस्तान मुस्लिम लीग के नेता नवाज शरीफ को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद 13 जुलाई की रात को नवाज शरीफ को लंदन से लौटने के बाद लाहौर हवाई अड्डे पर गिरफ्तार कर लिया गया।

नवाज शरीफ ऐसे नेता रहे जो तीसरी बार भी अपना प्रधानमंत्री कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। 28 जुलाई 2017 की ये सबसे बड़ी खबरों में एक थी। इस बीच एक सच तो ये भी है कि पाकिस्तान की पृष्ठभूमि में ये कोई नई बात नहीं है। नवाज शरीफ का कार्यकाल साल 2018 में खत्म होना था लेकिन उससे पहले ही उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। लेकिन नवाज शरीफ अकेले ऐसे नेता नहीं हैं। आज तक पाकिस्तान का कोई भी प्रधानमंत्री पाकिस्तान में अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया।

पाकिस्तान में अब तक 26 प्रधानमंत्री रहे। इनमें से तीन लोगों ने सुप्रीम कोर्ट की तरफ से आदेश आने के बाद सत्ता छोड़ी। इसमें बेनज़ीर भुट्टो का नाम भी शामिल है। इन सभी प्रधानमंत्रियों की कहानी अलग थी। किसी की हत्या कर दी गई तो किसी की सत्ता सेना ने छीन ली। वहीं कुछ ऐसे नेता भी रहे जो कई बार प्रधानमंत्री बने लेकिन एक बार भी कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए।

पाक के पहले प्रधानमंत्री की कर दी गई हत्या

15 अगस्त 1947 को पाकिस्तान के अस्तित्व में आने के बाद लियाकत अली खान प्रधानमंत्री बने। सत्ता संभालते हुए 4 साल 2 महीने ही हुए थे जब उनकी हत्या कर दी गई।

लियाकत के बाद ख्वाजा निजामुद्दीन ने सत्ता संभाली। लेकिन राजनीतिक उठा-पटक ऐसी शुरू हुई की 18 महीने में ही कुर्सी चली गई। सत्ता संभालने के लिए मोहम्मद अली बोगरा का नाम दिया गया। ये नाम शायद ही पहले किसी ने सुना था। ये एक गुमनाम नेता थे जिन्हें प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठाया गया। लेकिन कुछ ही दिनों में चुनाव हो गए और बोगरा का कार्यकाल अधूरा रह गया।

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पंडित नेहरू और पाकिस्तान के पहले प्रधानंमत्री लियाकत अली खान

इसके बाद सत्ता पर काबिज हुए मोहम्मद अली। ये पाकिस्तान का संविधान बनाने वालों में से एक थे। लेकिन साल 1956 में ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया। दरअसल उस दौरान राष्टपति रहे इस्कंदर मिर्जा के साथ अली के मनमुटाव काफी बढ़ गए थे। जब बात नहीं बनी तो उन्होंने एक साल से पहले ही अपना पद छोड़ दिया। पाकिस्तान में पीएम राष्ट्रपति का अहम सलाहकार होता है।

अली के बाद पहली बार ऐसा हुआ कि मुस्लिम लीग के अलावा किसी पार्टी के नेता ने देश की कमान संभाली। नाम था आवामी लीग। इसके नेता हुसैन शहीद सुहारदी पीएम बने । ये पार्टी पहली बार 1954 के चुनाव में जीती थी। उस दौरान आवामी लीग को राजनीति में बाहरी माना जाता था। इस सब के चलते इस्कंदर मिर्जा ने हुसैन को उनके पद से साल 1957 में हटा दिया।

इस्कंदर मिर्जा ने मुस्लिम लीग के नेता इब्राहिम इस्माइल चुद्रिगर को पाकिस्तान का पीएम बनाया। लेकिन फिर वही कहानी दोहराई गई। इस्कंदर मिर्जा से इब्राहिम की भी नहीं बनी और पीएम का पद फिर से खाली हो गया।

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पाकिस्तान में सेैन्य शासन की शुरुआत

इस्कंदर मिर्जा के महज़ दो साल के कार्यकाल में उन्होंने 4 प्रधानमंत्रियों को पद से हटाया। अब मिर्जा ने अपना आदमी फिरोज खान नून को पीएम पद पर बैठना सही समझा। ये रिपब्लिकन पार्टी से थे। नून ने मिर्जा के साथ मिलकर सत्ता का लुत्फ लिया लेकिन साल 1958 में ही सेना ने सत्ता हथिया ली और पाकिस्तान में सैन्य शासन की शुरुआत हुई।

जब संविधान से प्रधानमंत्री का पद ही हटा दिया गया

अय्यूब खान के नेतृत्व में सैन्य तख्तापलट हुआ और यही 24 अक्टूबर से अंतरिम राष्ट्रपति रहे। अय्यूब खान जब राष्ट्रपति बने तो पाकिस्तान का पुराना संविधान बदल दिया गया। नए संविधान में प्रधानमंत्री का पद ही हटा दिया गया था।

अय्यूब खान- जिसने संविधान से प्रधानमंत्री का पद ही हटा दिया

ऐसे में 1958 से लेकर 1973 कोई प्रधानमंत्री नहीं रहा। हालांकि बीच में याहया खान ने नुरूल अमीन को पीएम पद दिया ताकि वह याहया के अस्सिटेंट के तौर पर काम करें। इस दौरान ही पाकिस्तान भारत से युद्ध हारा जिसके बाद ही बांग्लादेश बना। इसके बाद याहया खान को इस्तीफा देना पड़ा और जुल्फिकार अली भुट्टो को राष्ट्रपति बनाया गया।

प्रधानमंत्री पद को दोबारा मिली मान्यता

भुट्टो साल 1973 में पाकिस्तान के पीएम भी बने। राष्ट्रपति रहते हुए वह नया संविधान लाए और उसमें पीएम के पद को मान्य कर दिया। लेकिन साल 1977 में एक बार फिर सैन्य तख्तापलट हुआ और मोहम्मद जिया उल हक राष्ट्रपति बन गए।

साल 1985 में पाकिस्तान को नया पीएम मोहम्मद खान जुनेजा के तौर पर मिला। लेकिन उसे भी हक ने साल 1988 से सत्ता से हटा दिया। हक की साल 1988 में मौत हो गई और उसी साल पाकिस्तान को पहली महिला प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो मिलीं। इन्होंने लगभग 20 महीने पीएम पद संभाला। कोर्ट के फरमान क बाद उन्हें भी सत्ता छोड़नी पड़ी।

पाकिस्तान की पहली महिला प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो

जब शरीफ ने सेना के सामने घुटने टेक दिए

भुट्टो के बाद गुलाम मुस्तफा जातोई पीएम बने इनको भी तीन महीने के लिए पद पर रहना नसीब हुआ। साल 1990 में पाकिस्तान मं चुनाव हुए और नवाज़ शरीफ पहली बार पीएम बने। लेकिन ढाई साल के बाद ही सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले को लेकर नवाज़ को अपदस्थ कर दिया। कुछ समय के लिए बलाख शेर माज़री ने भी अपनी सेवाएं इस पद पर दीं। लेकिन अक्टूबर 1993 से लेकर नवंबर 1996 तक बेनज़ीर ने वापस पीएम की कुर्सी हासिल कर ली। साल 1997 में नवाज शरीफ एक बार फिर सत्ता में आए। लेकिन उन्हें भी दो साल के बाद सेना के आगे हार मारनी पड़ी और जनरल परवेज़ मुशर्रफ का दौर शुरू हुआ।

परवेज़ मुशर्रफ का दौर शुरू हुआ।

देखा जाए तो साल 2002 से लेकर 2013 के बीच पाकिस्तान में सात पीएम हुए। इस दौरान सबसे लंबे समय के लिए पीएम बने युसूफ रज़ा गिलानी। इन्होंने चार साल और तीन महीने देश चलाया। बाद में गिलानी को भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस्तीफा देना पड़ा।

इतिहास बनाने से चूक गए नवाज शरीफ

नवाज शरीफ ने 5 जून 2013 को पीएम पद की शपथ ली। नवाज़ तीसरी बार शपथ ले रहे थे। उम्मीद की जा रही थी कि वह इस बार कार्यकाल पूरा करेंगे। ऐसा होता तो नवाज शरीफ इस साल तक प्रधानमंत्री बने रहते। लेकिन उससे पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने पनामा पेपर मामले में सुनवाई शुरू कर दी। कोर्ट ने नवाज शरीफ को दोषी माना और चार साल बाद नवाज शरीफ को एक बार फिर इस्तीफा देना पड़ा।

इसे पाकिस्तानी लोकतंत्र की कमज़ोरी कहें या पाक प्रधानमंत्रियों की बदकिस्मती..लेकिन सच तो ये है कि पाकिस्तान का लोकतंत्र एक ऐसा बीज है जो बोया तो जाता है, पौधा भी लगता है…लेकिन पौधा जैसे ही बड़ा होता है उसे उखाड़ दिया जाता है..उसे कभी पनपने का मौका ही नहीं दिया जाता। देखा जाए तो हर बार वजह अलग थी लेकिन पाकिस्तानी लोकतंत्र का सच आज भी वही है।

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