तैमूर लंग

तैमूर लंग- एक ऐसा हमलावर जिसने 15 दिनों में दिल्ली को बना दिया ‘मुर्दों’ का शहर

तैमूर लंग,,,एक ऐसा शासक जिसे इतिहास के पन्नों में एक क्रूर आक्रमणकारी के रूप में जाना जाता है। महमूद गजनवी और मुहम्मद गोरी की तरह ही तैमूर लंग भी भारत को लूटने के मकसद से दिल्ली आया था। तैमूर के भारत पर आक्रमण के वक्त यहां तुगलक वंश का राज था। तैमूर ने 1399 में अपनी फौज के साथ दिल्ली पर जो जुल्म ढाए उसका इतिहास गवाह है। वो दिल्ली में 15 दिन रहा। इन 15 दिनों में उसने दिल्ली को मुर्दों का शहर बना दिया। तैमूर लंग कश्मीर को लूटता हुआ वापस अपने देश समरकंद चला गया। लेकिन तैमूर की इस क्रूरता का इतिहास जानकर आज भी दिल्ली सेहर उठती है। तैमूर लंग 14वीं शताब्दी का शासक था जिसने तैमूरी राजवंश की स्थापना की थी, उसका राज्य पश्चिम एशिया से लेकर मध्य एशिया और भारत तक फैला था। भारत में मुगल साम्राज्य का संस्थापक बाबर,,,तैमूर का ही वंशज था।

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तैमूर कैसे बना ‘तैमूर लंग’ ?

तैमूर का जन्म 1336 में उज्बेकिस्तान के समरकंद में शहर-ए-सब्ज जगह पर एक आम परिवार में हुआ था। तैमूर एक मामूली चोर था, जो मध्य एशिया के मैदानों और पहाड़ियों से भेड़ों की चोरी किया करता था। कहा जाता है कि एक भेड़ चुराते वक्त चरवाहे के तीरों से तैमूर के शरीर का दाहिना हिस्सा बुरी तरह जख्मी हो गया था। चरवाहे का एक तीर तैमूर के कंधे पर लगा और दूसरा तीर उसके कूल्हे पर। आगे चलकर लोग उसे फारसी में मजाक-मजाक में तैमूर लंग बुलाने लगे।

चंगेज खां की तरह बनना चाहता था तैमूर

तैमूर लंग का बस एक ही सपना था कि वो शक्तिशाली शासक चंगेज खां की तरह बने। तैमूर, चंगेज खां का वंशज होने का दावा करता था लेकिन वास्तव में वो तुर्क था। तैमूर लंग, चंगेज खां से भी ज्यादा खतरनाक था। क्रूरता में उसका मुकाबला करने वाला कोई नहीं था। कहा जाता है कि एक जगह उसने करीब दो हजार जिंदा लोगों को ईंट और गारे में चुनवाकर मीनार बनवा डाली। चंगेज खां जहां पूरी दुनिया को एक साम्राज्य से बांधना चाहता था तो वहीं तैमूर का मकसद सिर्फ लोगों पर धौंस जमाना था।

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पिता की मौत के बाद 1369 में तैमूर लंग समरकंद का शासक बना। इसके बाद से उसकी क्रूरता और लूटपाट की यात्रा शुरू हुई।लअपने सिपहसालारों को भारत पर हमला करने के लिए राज़ी करने में उसे कुछ कठिनाईयों का सामना करना पड़ा। समरकंद में एक सभा में लोगों ने भारत जाने पर इसलिए ऐतराज जताया क्योंकि यहां गर्मी ज्यादा पड़ती है। फिर तैमूर ने वादा किया कि वो भारत में रुकेगा नहीं, बल्कि सिर्फ लूटपाट करके वापस आ जाएगा। इसके बाद तैमूर ने सबसे पहले पीर मोहम्मद को भारत पर आक्रमण के लिए रवाना किया। उसने मुल्तान पर घेरा डालकर वहां अपना अधिकार जमा लिया।

1398-99 में तैमूर अपनी भारी भरकम फौज लेकर समरकंद से भारत के लिए रवाना हुआ। मुल्तान से वो तुलुंबा पहुंचा और उसने यहां लूटपाट और हत्याएं की। फिर उसने भटनेर पर भी कब्जा किया। आखिर में वो दिल्ली तक पहुंच गया और यहां उसने खून की नदियां बहा दी। दिल्ली की दौलत लेकर तैमूर समरकंद वापस चला गया। इसके अलावा कई सैनिक और बंदी बनाई गई औरतों और शिल्पियों को भी वो अपने साथ ले गया। भारत से जो कारीगर वह अपने साथ ले गया उनसे उसने समरकंद में अनेक इमारतें बनवाई। भारत से लौटने के बाद 1400 में तैमूर लंग ने अनातोलिया पर आक्रमण किया और 1402 में अंगोरा के युद्ध में ऑटोमन तुर्कों को बुरी तरह हराया।

1405 में चीन के राजा मिंग के खिलाफ युद्ध के लिए बढ़ते वक्त कजाकिस्तान में तैमूर लंग की मौत हो गई। उसकी योग्यता सिर्फ़ उसके सिपहसलारों तक ही सीमित थी। क्योंकि असल में वह एक जंगली खानाबदोश था। उसने न तो कोई संगठन बनाया और न ही चंगेज खां की तरह साम्राज्य चलाने के लिए अपने पीछे कोई काबिल शख्स छोड़ा। इसलिए तैमूर लंग का साम्राज्य उसी के साथ ही खत्म हो गया।

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