भारत का संविधान

भारत का संविधान लिखने के लिए जवाहरलाल नेहरू के सामने क्या शर्त रखी गई?

संविधान निर्माता के तौर पर हम बी आर अंबेडकर को जानते हैं। संविधान बनाने के पीछे कई बुद्धिजीवियों का दिमाग था। इसलिए किसी एक को संविधान बनाने का श्रेय गलत है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत का संविधान एक अकेले व्यक्ति ने अपने हाथ से लिखा था। ये आदमी कोई और नहीं बल्कि दिल्ली के रहने वाले प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा थे। इन्हें संविधान को हाथ से लिखने की जिम्मेदारी दी गई थी।

रायज़ादा का जन्म दिल्ली में प्रेम प्रसाद के घर हुआ था। प्रेम प्रसाद अंग्रेज़ी और फारसी के अच्छे जानकार थे। रायज़ादा ने अपने दादा प्रेम प्रसाद से ही कैलिग्राफी सीखी थी। रायज़ादा जब छोटे थे तो वह अपने चार भाईयों के साथ अपने दादा से कैलिग्राफी सीखा करते थे। बचपन में ही माता-पिता के निधन के बाद रायज़ादा को उनके दादा ने पाला था।

प्रेम बिहारी नारायण रायजादा

भारत का संविधान बनकर तैयार तो हो रहा था लेकिन चुनौती थी कि आखिर इसे लिखेगा कौन? उन दिनों प्रिंटिंग की व्यवस्था नहीं थी ऐसे में सारा संविधान हाथ से लिखकर ही तैयार करना था। ऐसे में जवाहर लाल नेहरू को प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा के बारे में पता चला। नेहरू को पता चला कि रायज़ादा कैलिग्राफी जानते हैं और उनके लेखनी बहुत सुंदर है। ऐसे में नेहरू ने उनसे संपर्क किया।

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जवाहर लाल नेहरू ने रायज़ादा के सामने भारत का संविधान लिखने का प्रस्ताव रखा। रायज़ादा इस बात से बहुत खुश हुए। उनकी खुशी उनके चेहरे पर साफ देखी जा सकती थी। इसके बाद जवाहर लाल नेहरू ने उनसे पूछा कि वो संविधान लिखने के बदले में क्या लेंगे? मतलब साफ था कि संविधान लिखने के एवज़ में वो कितना वेतन लेंगे। लेकिन रायज़ादा ने संविधान लिखने के एवज़ में कुछ भी लेने से मना कर दिया। हालांकि उन्होंने एक शर्त रखी। रायज़ादा ने कहा कि मैं भारत का संविधान लिखने के बदले तो कुछ नहीं लूंगा लेकिन मेरी एक इच्छा आप लोगों को पूरी करनी होगी। ऐसे में जवाहर लाल नेहरू दो मिनट चुप रहे। फिर कुछ सोच कर बोले, बताएं क्या चाहते हैं आप।

रायज़ादा ने बहुत संजीदगी से कहा मेरे पास भगवान का दिया सबकुछ है , बस मैं इतना चाहता हूं कि संविधान के हर पेज पर मेरा नाम लिखा जाए और आखिरी पेज पर मेरे दादा जी के नाम को जगह दी जाए। नेहरू ये बात सुनकर बहुत खुश हुए। उन्होंने ऐसा करने की मंजूरी दे दी। रायज़ादा भी फौरन अपने काम में लग गए। उन्होंने 6 महीनों में संविधान लिखने का काम पूरा किया। इस संविधान को लिखने में 254 दवात और 303 पेन का इस्तेमाल किया गया। संविधान की असली कॉपी पर रायज़ादा की निशानियां आज भी मौजूद हैं।

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संविधान की असल कॉपी पर जनवरी 1950 में हस्ताक्षर किए गए। उसी महीने की 26 तारीख से संविधान को लागू कर दिया गया। इसके अलावा संविधान में कई मशहूर ऑर्ट वर्क भी देखे जा सकते हैं। संविधान जब बनकर तैयार हो गया तो उस पर उस महान कार्य से जुड़े हर व्यक्ति ने हस्ताक्षर भी किए। हालांकि संविधान निर्माण की अनोखी कहानी जिस व्यक्ति के कहने पर शुरू हुई उन्हीं के हस्ताक्षर इस पर नहीं हैं। हम बात कर रहे हैं महात्मा गांधी की क्योंकि जब संविधान को अपनाया गया तब तक महात्मा गांधी का निधन हो चुका था।

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