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क्यों भारतीय मीडिया को राहुल कंवल की नहीं बल्कि शब्बीर अहमद जैसे पत्रकारों की जरूरत है?

राहुल कंवल, एक ऐसा नाम जो भारतीय पत्रकारिता में पिछले 19 सालों से सुना जा रहा है। सैनिक परिवार से आने वाले राहुल कंवल के बारे में कहा जाता है कि वो एक ईमानदार पत्रकार हैं। राहुल का ज्यादातर समय अंग्रेजी पत्रकारिता में ही बीता इसलिए ज्यादातर लोग शायद उन्होने उतना नहीं जानते जितना हिंदी पत्रकारिता के दूसरे बड़े एकर्स को जानते हैं। मौजूदा समय के बात करें तो राहुल अब हिंदी और अंग्रेजी दोनों ही चैनलों में ज्यादा सक्रिय रहते हैं। दूसरी भाषा में कहा जाए तो वो इंडिया टुडे ग्रुप का चेहरा बन चुके हैं। लेकिन हाल ही में हुए इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में कुछ ऐसा हुआ जो न सिर्फ राहुल कंवर के 19 साल के पत्रकारिता पर सवाल उठा उठा रहा है, बल्कि भारतीय मीडिया को भी आईना दिखा रहा है। ऐसा क्या हुआ जो आज राहुल कंवल सवालों के घेरे में ये जानेंगे लेकिन राहुल कंवल के बारे में पहले ये भी जान लेते हैं।

कौन है राहुल कंवल?

  1. 19 साल से भारतीय पत्रकारिता में काम कर रहे राहुल कंवल,

  2. 1999 में राहुल ने Zee News(ज़ी न्यूज) से अपना करियर शुरू किया

  3. 2002 में राहुल Aaj TaK(आज तक) आ गए, यहां वो विदेश और रक्षा सबंधी मामलो को देखते थे

  4. 2008 में राहुल Headlines Today(हेडलाइंस टुडे) में बतौर एंकर आए

  5. 27 साल की उम्र में ही राहुल हेडलाइंस टुडे के एक्जीक्यूटिव एडीटर बन गए

  6. राहुल अभी India Today के न्यूज एडिटर हैं।

राहुल कंवल के इन इंटरव्यू को जरूर देखा होगा आपने

मुस्लिम सैनिक पर आजम से पूछा था सवाल- वीडियो देखें

यूपी चुनाव से पहले अखिलेश यादव का इंटरव्यू- वीडियो देखें

बाइक पर लिया हार्दिक पटेल का इंटरव्यू- वीडियो देखें

क्रांतिकारी या फिर TRP वाले पत्रकार हैं राहुल कंवल?

राहुल कंवल को अक्सर कहते सुना गया है कि वो और उनकी टीम TRP के लिए नहीं, बल्कि असली पत्रकारिता के लिए काम करती है। राहुल कंवल के एक शो का अंश पिछले दिनों काफी देखा गया था जहां वो हिंदू युवा वाहिनी के प्रमुख, नगेन्द्र सिंह तोमर से शो के दौरान ही भिड़ गए। मामला लव जिहाद और मॉरल पुलिसिंग को लेकर था। दरअसल आरोप था कि हिंदू युवा वाहिनी के लोग लड़के-लड़कियों को धर्म और समाज के नाम पर परेशान कर रहे हैं। इस मुद्दे पर राहुल इस कदर लड़ गए कि उन्होनें नगेन्द्र सिंह तोमर को शो छोड़ कर जाने को कह दिया।

2 मिनट 24 सेकेंड के वीडियो को देखने के बाद आपको दो चीज लगेगी। या तो राहुल कंवल लोगों के हक के लिए लड़ रहे हैं या फिर ये एक TRP स्टंट हैं। राहुल के इस वीडियो को चैनल ने हक की लड़ाई के रूप में दिखाया लेकिन हाल में हुई एक घटना अब इस वीडियो पर भी सवाल उठा रही है।

क्यो चुप रहे राहुल कंवल?

हाल ही में India Today ने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में एक शो का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम में लेफ्ट छात्र नेता कन्हैया कुमार, शहला रशीद, भाजपा से रोहित चहल, लेखिका शुभराष्ट्रा और पाटीदार नेता हार्दिक पटेल शामिल थे। कार्यक्रम में कई बार तीखी बहस हुई। इसी बीच कन्हैया कुमार से राहुल कंवल ने पूछा कि अगर लेफ्ट केरल भी हार जाता है तो इस पार्टी को भारत में ढूंढ पाना मुश्किल होगा, इस जवाब में कन्हैया बोलते-बोलते ‘बहन’ की गाली दे बैठे। कन्हैया की गाली को मंच पर बैठे मेहमानों ने, एंकर ने, वहां मौजूद लोगों ने और लाइव टीवी पर दर्शकों ने सुना।

वीडियो के -46:29 मिनट पर कन्हैया ने गाली दी है।

कन्हैया की गाली पर उम्मीद की जा रही थी कि राहुल वही तेवर दिखाएंगे जो उन्होनें नगेन्द्र सिंह तोमर के खिलाफ दिखाई थी लेकिन राहुल चुप रहे या फिर उन्होने प्रतिक्रिया भी नहीं दी। इस घटना के बाद से इंडिया टुडे और राहुल कंवल की सोशल मीडिया पर जमकर आलोचना हो रही है। कोई उनपर पक्षपात का आरोप लगा रहा है तो कोई उन्हें पत्रकारिता की याद दिला रहा है।

Times Now के रिपोर्टर के रिपोर्टर शब्बीर अहमद क्यों है मिसाल?

लाइव टीवी पर कन्हैया कुमार द्वारा बहन की गाली देने के बावजूद भी राहुल कंवल और इंडिया टूडे ग्रुप की खामोशी टाइम्स नाव के रिपोर्टर शब्बीर अहमद की याद दिला रहा है। दरअसल इसी साल 16 जनवरी(मंगलवार) को एक कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए गुजरात से विधायक जिग्नेश मेवाणी चेन्नई पहुंचे। जिग्नेश यहां कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्रों से मिलने आए थे। 2 घंटे के कार्यक्रम के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस का  आयोजन किया गया था। जिग्नेश जैसे ही प्रेस कॉन्फ्रेंस करने पहुंचे उनकी नजर टेबल पर रखे रिपब्लिक टीवी चैनल के माइक पर गई। जिग्नेश मेवाणी रिपब्लिक टीवी का माइक देखते ही भड़क गए और उसे हटाने को कहने लगे। जिग्नेश मेवाणी ने कहना शुरू कर दिया कि रिपब्लिक टीवी का रिपोर्टर कौन है? इसके बाद उन्होंने रिपब्लिक टीवी के पत्रकार को भी बाहर जाने को कहा।

 

मामला तूल पकड़े इससे पहले वहां मौजूद कुछ पत्रकारों ने जिग्नेश मेवाणी को समझाना शुरू किया। पत्रकारों ने जिग्नेश से कहा कि यहां कोई व्यक्तिगत इंटरव्यू नहीं होगा लेकिन जिग्नेश माने नहीं, उन्होने पत्रकारों से कहा कि वो किसी भी चैनल से तब तक बात नहीं करेंगे जबतक रिपब्लिक टीवी का माइक न हटाया जाए। इस पर टाइम्स नाउ के रिपोर्टर शब्बीर अहमद ने जिग्नेश मेवाणी से कहा कि वो ऐसी मांग नहीं कर सकते। शब्बीर अहमद ने जिग्नेश से कहा कि वो नहीं बताएंगे कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में किस चैनल का माइक रहेगा और किसका नहीं। शब्बीर की बात से जिग्नेश और भड़क गए और अपनी बात पर अड़ गए, इसके बाद  वहां मौजूद पत्रकारों ने एकजुट होकर जिग्नेश का ही बहिष्कार कर दिया और उन्हें जाने को कह दिया। ये उन चुनिंदा मौकों में से एक था जब मीडिया की एक जुटता देखने को मिली

कहना गलत नहीं होगा कि जिग्नेश मेवाणी को पहली बार मीडिया ने आइना दिखाया था, जिसे दिल्ली की मीडिया अभी तक दिखाने में नाकाम थी। ऐसे में सवाल ये है कि क्या राहुल कंवल की जगह अगर शब्बीर अहमद जैसे पत्रकार होते तो आज कन्हैया कुमार को भी सीख मिल गई होती? क्या राहुल को कन्हैया से मंच छोड़ कर जाने के लिए नहीं कहना चाहिए था? क्या इंडिया टुडे ग्रुप को कन्हैया को मंच पर बैठाने की जगह उनका बहिष्कार नहीं करना चाहिए था। क्या वहां मौजूद बाकि मेहमानों की खामोशी कन्हैया के हौसले को नहीं बढ़ाएगी? इन सारी चीजों में से एक भी चीज नहीं हुई, शायद इसी कारण पत्रकारिता और राजनीति दोनों ही बदनाम हो रही हैं और शब्बीर अहमद जैसे पत्रकार याद किए जा रहे हैं…..

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