दिवाली

पटाखें भी जलेंगे और कानून भी तोड़ा जाएगा.. क्योंकि ये बदले की दिवाली है

9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला दिया। इस फैसले में 1 नवंबर तक दिल्ली में पटाखों की बिक्री पर रोक लगा दी गई। कोर्ट के इस फैसले से पटाखा व्यापारी खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। थोक व्यापारियों से लेकर छोटे दुकानदार तक इस फैसले से दुखी हैं। इनका कहना है कि कोर्ट ने इन्हे समय तक नहीं दिया। दिल्ली के पटाखा व्यापारियों और खरीदारों के नजरिए से जानते हैं कि क्यों सुप्रीम कोर्ट का फैसला जमीनी हकीकत से दूर है? क्यों ये फैसला दिवाली में पटाखें जलाने से किसी को रोक नहीं पाएगा…

दिल्ली का व्यापारी क्यों है नाराज?

दिल्ली के पटाखा व्यापारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने न तो पटाखा जलाने पर प्रतिबंध लगाया है और न ही दूसरे राज्यों से पटाखा लाने पर। ऐसे में अगर कोई नुकसान उठा रहा है तो वो केवल दिल्ली का पटाखा व्यापारी है।

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व्यापारियों की क्या है गलती?

व्यापारियों के मुताबिक इस साल दिल्ली पुलिस ने 400 व्यापारियों के लाइसेंस जारी किए थे। इसके बाद व्यापारियों ने पटाखों का स्टॉक जमा करना शुरू कर दिया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इन सभी 400 व्यापारियों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए। व्यापारी ऐसे में सवाल कर रहे हैं कि अगर यही करना था तो उन्हें लाइसेंस क्यों जारी किए गए? दिवाली पर उनके होने वाले नुकसान की कौन भरपाई करेगा?

3,000 करोड़ तक का हो सकता है नुकसान

चीन के पटाखों पर प्रतिबंध के बाद देश का पटाखा उद्योग तमिलनाडु के शिवकाशी पर निर्भर है। शिवकाशी का पटाखा उद्योग 7 हजार करोड़ से लेकर 10 हजार हजार करोड़ तक के बीच है। भारत का 85 फीसदी पटाखा उद्योग शिवकाशी पर ही निर्भर करता है। दिल्ली मेें लगे प्रतिबंध के बाद अंदाजा लगाया जा रहा है कि पटाखा उद्योग को करीब 3 हजार करोड़ या उससे ज्यादा का नुकसान इस दिवाली होगा।

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8 लाख से ज्यादा लोगों की रोजी रोटी खतरे में

तमिलनाडु के शिवकाशी में 5 लाख से ज्यादा लोग पटाखा उद्योंग में काम करते हैं और करीब 3 लाख से ज्यादा लोग अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जहां ये लोग नाराज़ है वहीं डरे हुए भी। पटाखे की कई फैक्ट्रियों के बंद होने का भी ख़तरा इन लोगों को सताने लगा है। इन लोगों को इस बात का भी डर है कि कहीं दूसरे राज्यों की सरकार दिवाली पर पटाखों को बैन न कर दे

छोटे व्यापारी और दुकानदार कैसे करेंगे भरपाई?

एक अनुमान के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर में दिवाली के आसपास करीब 25 हजार पटाखों के छोटे स्टॉल लगते हैं। इन स्टॉल में पटाखा बेचने वाले वहीं लोग है जो रक्षाबंधन या होली पर राखी या रंग लाकर बेचते हैं और मुनाफा कमा कर व्यापार बदल लेते हैं। इस दिवाली इन छोटे व्यापारियों के लिए भी परेशानी खड़ी हो गई है… क्योंकि इन लोगों ने समान तो खरीद लिए हैं लेकिन वो अब इन्हें बेंच नहीं सकते। ये उन बड़े व्यापारियों की तरह नहीं हैं जो 1 नवंबर बाद शादियों में पटाखों की सप्लाई करके अपना मुनाफा कमा लेंगे।

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ब्लैक मार्केट को बढ़ावा?

इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक पटाखा व्यापारी पटाखों को बेचने के लिए नई तरकीब निकाल रहे हैं। वो गिफ्ट पैक के माध्यम से ऑन लाइन पटाखों को बेच रहे हैं। इसके लिए प्रोडक्ट की Branding और Marketing, Whats app पर की जा रही है। इसके लिए बकायदा कोडवर्ड का इस्तेमाल किया जा रहा है जैसे आलू मतलब सूतली बम और पेंसिल मतबल रॉकेट बम। इन पटाखों की डिलवरी घर तक हो रही है और इसके लिए कमीशन जमकर बांटे जा रहे हैं।

वहीं छोटे दुकानदार अपनेे सामानों को चोरी छिपे बेचने में लगे है। ये दुकानदार सस्ते दामों में अपने पटाखों को बेच रहे हैं ताकि पटाखों का दाम निकल सके। जबकि दिल्ली-एनसीआर की सीमाओं पर पटाखे ज्यादा दामों पर बिक रहे हैं। दिल्ली का खरीदार पटाखों को बार्डर पार से महंगे दामों पर खरीद रहा है। कुल मिला कर देखा जाए तो पटाखों का ब्लैक मार्केट ज़ोरों पर है।

पुलिसराज को बढ़ावा!

कई जगहों पर पुलिस पटाखें बेचने वालों को पकड़ रही हैं। ऐसे में कुछ छोटे विक्रेताओं का कहना है कि कुछ पुलिसवाले उनसे पैसे की मांग कर रहे हैं। नाम न बताने पर कुछ छोटे विक्रेताओं ने कहा कि वो चोरी छिपे अपना सामान बेच रहे हैं बदले में उन्हें कुछ दलालों को पैसा देने पड़ रहा है। दलाल कुछ हिस्सा अपने पास रख रहे हैं और बाकि का पैसा पुलिसवालों तक पहुंचा रहे हैं।

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क्या है खरीदारों की सोच?

नोएडा, गाजियाबाद, गुड़गाव और दिल्ली में रह रहे कई लोग बार्डर पार से पटाखें खरीद कर ला रहे हैं। इन खरीदारों की दलील है कि एक दिन पटाखा जलाने से कोई असर नहीं पड़ेगा। कई अखबारों के रिपोर्ट भी बता रह हैं कि पटाखों की खरीदारी हो रही है। ऐसे में दिवाली पर आतिशबाजी पिछले बार कि तुलना में कितनी होगी ये उसी दिन पता चलेगा।

भगवान राम के स्वागत में मनाई जानी वाली दिवाली इस बार राजनैतिक हो चुकी है, हिंदू-मुस्लिम का बड़ा एजेंडा हो चुकी है … ऐसे में अगर नुकसान किसी का हो रहा है तो वो पटाखा व्यापारियोंं का जिनकी दिवाली तो निरस हो चुकी है… ऐसे में कानून भी तोड़े जा रहे हैं और पटाखें भी जलाए जाएंगे…क्योंकि बहुत लोगों के लिए ये दिवाली अब सिर्फ बदले की दिवाली है…

[नोट- कई आंकड़े इकनॉमिक टाइम्स, इंडिया टुडे और द हिंदू से लिए गए हैं]

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